कविता, गीत और व्यंग्य से सजी शाम- शहीदों को समर्पित कवि सम्मेलन का आयोजन

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर

देश पर मर मिटने वाले शहीदों की शहादतों को याद करते हुए साहित्यिक संस्था विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ ईशीपुर के बैनर तले स्थानीय खलीफाबाग स्थित राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी में एक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। राष्ट्रभक्ति भावों से ओतप्रोत इस भव्य कवि सम्मेलन की अध्यक्षता विद्यापीठ के उप कुलपति डॉ.अंजनी कुमार सुमन ने की,वहीं इसका संचालन विद्यापीठ के संयोजक लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ.प्रेमचन्द पांडेय ने कुशलता पूर्वक किया।

पं.शंभुनाथ शास्त्री वेदांती समारोह के मुख्य अतिथि थे,जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध गीतकार राजकुमार मंचासीन थे। समारोह का आगाज गीतकार राजकुमार द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया। मौके पर उन्होंने राष्ट्रभक्ति गीत हिंदुस्तान हमारा है,सबकी आँखों का तारा है को भावपूर्ण स्वर देकर माहौल को देशभक्ति भावों से भर दिया। इसके बाद तो कविताओं एवं गीतों की झड़ी लग गई। इस क्रम में डॉ.मनजीत सिंह किनवार ने भाईचारे से लबरेज आदर्श देश की कल्पना करते हुए अपनी भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया : प्यार ही प्यार हो,अब न तकरार हो, देश बने और ज्यादा हसीन। पूर्णेन्दु चौधरी की पंक्ति थी : ” तेरे उर के दीये से उजाले लिये हम अंधेरों में रास्ते बनाते रहे। मौके पर गीतकार मुरारी मिश्र के अंगिका कवित्त छंद : सबसे मिट्ठो गीत वंदे मातरम ने देशभक्ति भावों को झंकृत कर श्रोताओं को आनन्द के सागर में डुबो दिया।

इसी क्रम में लोकगायक संजीव कुमार झा ने अपने अंगिका गीत घरों में पानी छै,ऐंगना में पानी, कैहिने गोस्सैलो छै गंगा महारानी को स्वर देकर बाढ़ की विभीषिका का ऐसा जीवंत स्वरूप पेश किया कि हर की आँखें नम हो गई। ऐसी ही त्रासदी का चित्रण कर अंगिका कवि त्रिलोकी नाथ दिवाकर की पंक्ति उमड़ै छै गांग पिया रहवै केनां ने लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। व्यंग्यकार सुनील कुमार पटेल ने कुत्ता का बच्चा शीर्षक से अपनी कविता का पाठ कर बताया कि आज कुत्ते से बदतर जिंदगी मानव जीता है।

मौके पर सुप्रसिद्ध नाटककार शीतांशु अरुण,कामता प्रसाद सिंह,महेंद्र प्रसाद निशाकर,ध्रुव कुमार सिंह, अभय कुमार भारती,कमर ताबां,विनय कबीरा,सोहन मंडल,भानु झा,विनोद कुमार राय,मिथिलेश आनन्द,सूरज कुमार भगत,साथी सुरेश सूर्य,प्राण मोहन प्रीतम,इकराम हुसैन शाद, धीरज पंडित और सच्चिदानंद साह किरण समेत कई कवियों ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया।