न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
बिहार के भागलपुर ज़िले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत बिहपुर प्रखंड के मिल्की गाँव (भालपुर क्षेत्र) में स्थित हज़रत सैयदना दाता मंगन शाह की दरगाह लगभग ढाई सौ वर्षों से भी अधिक पुरानी सूफी परंपरा का एक प्रतिष्ठित केंद्र है। यह दरगाह न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थल है, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दाता मंगन शाह का उर्स मेला श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। उर्स की शुरुआत 5 फरवरी की रात्रि 12 बजकर 5 मिनट पर परंपरागत रूप से एक हिंदू कायस्थ परिवार द्वारा चादरपोशी के साथ हुई, जो 12 फरवरी 2026 तक चलेगा। स्थानीय उर्स कमिटी के अनुसार, यह परंपरा लगभग 250 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है, जो बिहार की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
कमिटी के सदस्यों ने बताया कि उर्स मेले में न केवल भागलपुर जिले बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु शिरकत करते हैं। उर्स का आयोजन हज़रत मंगन शाह की पुण्यतिथि के अवसर पर किया जाता है, जो समय के साथ नौगछिया और आसपास के क्षेत्रों का एक प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है।
सूफी परंपरा में उर्स को आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु दरगाह पर दुआ, मन्नत और चादरपोशी के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते हैं। मान्यता है कि दरगाह पर आने से मानसिक शांति, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। विभिन्न समुदायों के लोग समान श्रद्धा के साथ यहाँ उपस्थित होकर मानवता, सेवा और करुणा के सूफी संदेश को आत्मसात करते हैं।
उर्स मेले की सबसे विशेष और उल्लेखनीय परंपरा यह है कि पहली चादर बिहपुर के एक हिंदू कायस्थ परिवार द्वारा चढ़ाई जाती है। यह परंपरा दो शताब्दियों से भी अधिक समय से चली आ रही है और धार्मिक सौहार्द का अद्भुत उदाहरण पेश करती है। उर्स के दौरान हिंदू, मुस्लिम सहित अन्य समुदायों के लोग समान भाव से पूजा-अर्चना और प्रार्थना में शामिल होते हैं, जो सामाजिक एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश देता है।
धार्मिक महत्व के साथ-साथ उर्स मेला एक लोक सांस्कृतिक उत्सव का रूप भी ले लेता है। मेले में स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, खिलौनों और रोज़मर्रा की वस्तुओं की दुकानों से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और आजीविका के अवसर भी सृजित करता है।
वर्तमान समय में जब समाज विभाजन की चुनौतियों से जूझ रहा है, हज़रत सैयदना दाता मंगन शाह का उर्स मेला भाईचारे, सहिष्णुता और सामाजिक सौहार्द का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह आयोजन न केवल बिहार की साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक शांति और आपसी विश्वास को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।



























