- डेंगू व चिकनगुनिया के चिकित्सकीय प्रबंधन पर ट्रेनिंग फॉर ट्रेनर्स कार्यशाला का आयोजन
न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां आज गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी हैं। इनसे बचाव के लिए जागरूकता और चिकित्सकीय क्षमता दोनों आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और ड्रग फॉर नेगलेक्टेड डिजिज (DNDi) के तकनीकी सहयोग से डेंगू व चिकनगुनिया के चिकित्सकीय प्रबंधन पर “ट्रेनिंग फॉर ट्रेनर्स” कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डब्ल्यूएचओ के स्टेट कोऑर्डिनेटर (NTD) डॉ. राजेश पाण्डेय ने कहा, “अपने घर के फ्रिज, कूलर, पानी की टंकी, गमले आदि की नियमित साफ-सफाई कर और पानी को बदलकर डेंगू व चिकनगुनिया के लार्वा को नष्ट किया जा सकता है।”
इससे पूर्व जिले के विभिन्न प्रखंडों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत मेडिकल ऑफिसर्स और सीएचओ को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने इन बीमारियों के चिकित्सकीय प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने भागलपुर जिले में डेंगू के वर्तमान हालात और उपचार की व्यवस्था पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर राजेन्द्र मेमोरियल चिकित्सा विज्ञान संस्थान (RMRI) के निदेशक डॉ. कृष्णा पाण्डेय ने डेंगू और चिकनगुनिया के कारण, लक्षण और उपचार के विषय में विस्तार से बताया।
लक्षणों की पहचान और सावधानी बेहद ज़रूरी
DNDi के ऑपरेशनल हेड अमित मलिक ने बताया कि डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि शामिल हैं।
यह रोग एडीज मच्छर के काटने से फैलता है, जिसका लार्वा ठहरे हुए साफ पानी में पनपता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि “डेंगू बुखार के उपचार में केवल पैरासिटामोल का प्रयोग करें। एस्प्रिन और ब्रूफेन से परहेज करें, ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।”
प्रमुख सहभागिता
कार्यशाला में DNDi के ऑपरेशन हेड अमित मलिक, एसपीओ ऑफिस पटना से मोहम्मद आरिफ, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी रविकांत साह, कृति कुमारी, पीरामल स्वास्थ्य के विजय कुमार, सीफार के सीनियर प्रोजेक्ट एसोसिएट जयप्रकाश कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।
जागरूकता ही है सुरक्षा की कुंजी
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए नियमित साफ-सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और लक्षणों की पहचान अति आवश्यक है।



























