- छत झड़ रही, दीवारें दरक रहीं, बिजली–पानी का जानलेवा खेल
- डर के साए में पढ़ने को मजबूर छात्र–शिक्षक, प्रशासन बेख़बर
न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
भागलपुर का प्रतिष्ठित टीएनबी लॉ कॉलेज—जिसका नाम सुनते ही कानून, संविधान और न्याय की बातें ज़ेहन में आती हैं—आज खुद कानून और सुरक्षा की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहा है। कॉलेज के मुख्य द्वार से भीतर कदम रखते ही हरियाली, फूलों के बाग और सुंदर परिसर भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन जैसे ही कोई मुख्य भवन और क्लासरूम तक पहुँचता है, हकीकत डराने लगती है।
कॉलेज की छतें झड़ रही हैं, दीवारें दरक चुकी हैं और हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। हालात ऐसे हैं कि छात्र क्लास में बैठने से पहले किताब नहीं, ऊपर की छत देखते हैं—
“हे भगवान! आज ज़िंदा बाहर निकल जाएँ।”
जहाँ कानून पढ़ाया जाना चाहिए, वहाँ डर पढ़ाया जा रहा है
टीएनबी लॉ कॉलेज में पढ़ाई आज ज्ञान के माहौल में नहीं, बल्कि डर और आशंका के साए में हो रही है। कई क्लासरूम की छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है। छात्र बताते हैं कि पढ़ाई से ज़्यादा ध्यान इस बात पर रहता है कि कहीं छत सिर पर न गिर जाए।
शौचालय बदहाल, पानी और बिजली बना जानलेवा खतरा
कॉलेज के शौचालयों की हालत और भी शर्मनाक है। खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं, जिनकी जगह तार लपेटकर जुगाड़ किया गया है। पीने के पानी के नाम पर ईंटों पर रखी पानी की टंकी, जो कभी भी गिर सकती है।
दूसरी इमारत के क्लासरूम में छत से पानी टपकता रहता है, जो सीधे बिजली के पंखों और तारों तक पहुँचता है। कर्मचारियों का कहना है कि हर साल पंखे खराब हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन अब तक सोया हुआ है।
मुख्य भवन जर्जर, दीवारें फटीं, छज्जे गिरे
मुख्य भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। प्राचार्य आवास की करीब 100 फीट चहारदीवारी गिर चुकी है। कॉलेज का छज्जा तीन जगहों से गिर चुका है, लेकिन महीनों बाद भी मरम्मत नहीं हुई।
कॉलेज के सामने बने एक स्ट्रक्चर को तोड़ दिया गया, लेकिन दो महीने से मलबा वैसे ही पड़ा है, जो कभी भी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
बिजली बोर्ड जर्जर, कैंटीन तक नहीं
क्लासरूम में बिजली के बोर्ड पूरी तरह जर्जर हैं—कहीं तार लटक रहे हैं, तो कहीं बोर्ड हवा में झूल रहे हैं। छात्रों के लिए कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।
नया कानून लागू, लेकिन सिलेबस अब भी पुराना
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) एक जुलाई 2024 से लागू हो चुकी है, लेकिन टीएनबी लॉ कॉलेज के सिलेबस में अब तक इसे शामिल नहीं किया गया है।
इस लापरवाही से छात्रों का भविष्य सीधे तौर पर खतरे में पड़ गया है।
प्रभारी प्राचार्य का जवाब—जिम्मेदारी टालने वाला
इस पूरे मामले पर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य संजीव कुमार सिन्हा कहते हैं—“विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है, स्वीकृति के बाद आगे पहल होगी।”
लेकिन सवाल यह है कि जब जान पर बन आए, तब भी सिर्फ प्रस्ताव और स्वीकृति का इंतज़ार क्यों?
छात्रों का आंदोलन, मांगपत्र सौंपा
इन तमाम समस्याओं को लेकर टीएनबी लॉ कॉलेज छात्र आरजेडी अध्यक्ष अभिमन्यु कुमार के नेतृत्व में छात्रों ने प्राचार्य को मांगपत्र सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन जागेगा?
या फिर टीएनबी लॉ कॉलेज के छात्र और शिक्षक यूँ ही डर के साए में पढ़ने–पढ़ाने को मजबूर रहेंगे?



























