रविंद्र कुमार शर्मा, भागलपुर
भागलपुर में गंगा के उफान ने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) को टापू बना दिया है। इस बार जलस्तर पिछले साल से ऊंचा है, और पूरा परिसर पानी में डूब चुका है। निचले तल जलमग्न होने से फाइलें और जरूरी दस्तावेज़ हड़बड़ी में ऊपरी मंजिल पर पहुंचाए गए हैं।
अब प्रोफेसर और कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय तक नाव से जा रहे हैं। जलभराव के बीच सांप-बिच्छुओं का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कामकाज रोकने से साफ इनकार कर दिया है।
इसी बीच, राष्ट्रपति का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिससे प्रशासनिक तैयारी और चुनौतीपूर्ण हो गई है। प्रतिमा स्थल भी पानी में डूबा है, लेकिन जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय लगातार काम कर रहे हैं। कुलपति प्रो. जवाहरलाल ने कहा, “हम प्रकृति से नहीं लड़ सकते, लेकिन 15 अगस्त और राष्ट्रपति दौरे की तैयारी हर हाल में पूरी होगी, चाहे नाव से दफ्तर जाना पड़े।”
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने एनटीपीसी से रेत मंगवाकर स्थल को बचाने और टाइल का काम समय पर खत्म करने की व्यवस्था शुरू कर दी है। नाविक, बिजली मिस्त्री और डॉक्टर 24 घंटे अलर्ट पर हैं।
गंगा के उफान, लगातार बारिश और सांप-बिच्छुओं के खतरे के बीच भी TMBU ‘काम रुकेगा नहीं’ की नीति पर अडिग है। यह जंग सिर्फ बाढ़ से नहीं, समय और प्रतिष्ठा से भी है।

































