न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में सड़कों का जाल बिछाने की राह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार सरकार से उन नेशनल हाईवे (NH) परियोजनाओं की सूची मांगी है, जिन पर काम शुरू नहीं हो सका है। विशेष रूप से 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजनाओं पर अब दिल्ली से सीधी निगरानी रखी जाएगी।
नितिन गडकरी करेंगे समीक्षा बैठक
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 16-17 फरवरी को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार की उन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति जानना है जो टेंडर होने या काम आवंटित (Award) होने के बाद भी ठप पड़ी हैं।
इन प्रमुख परियोजनाओं पर रहेगी नजर:
समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण बाईपास और पुल परियोजनाओं के भाग्य का फैसला हो सकता है:
बाईपास परियोजनाएं: आरा, बक्सर, शेखपुरा, जमुई, खैरा, मानगोबंदर, कटिहार, दाउदनगर और नासरीगंज जैसे महत्वपूर्ण इलाकों के बाईपास का काम अब भी अधर में है।
पुल और आरओबी: समस्तीपुर-दरभंगा के बीच आरओबी, बूढ़ी गंडक में मेहरौना घाट पर बन रहा पुल और अरवल पुल की स्थिति की भी जांच की जाएगी।
हाईवे और कनेक्टिविटी: पटना-आरा-सासाराम और वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे जैसी बड़ी परियोजनाओं को तत्काल शुरू करने का निर्देश मिल सकता है।
देरी का कारण और सरकार का एक्शन प्लान
विभागीय सूत्रों के अनुसार, ऐसी कई सड़कें हैं जिनका काम टेंडर होने के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन परियोजनाओं का काम ‘अवार्ड’ हो चुका है, उन्हें अब और लंबित नहीं रखा जा सकता। इस बैठक में बिहार में मौजूद नेशनल हाईवे के रखरखाव (Maintenance) पर भी गहन चर्चा की जाएगी।
आम जनता के लिए इसके मायने
इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे यात्रा का समय घटेगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अटके हुए बाईपास बनने से शहरों के भीतर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत मिलेगी।

































