राजद की सियासत : ‘छुट्टी’ खत्म, चुनौतियां शुरू; लालू-तेजस्वी की ‘मिडनाइट मीटिंग’ के आखिर क्या हैं सियासी मायने?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना/दिल्ली
करीब एक महीने के लंबे विदेश प्रवास के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के ‘खेवनहार’ तेजस्वी यादव भारत लौट आए हैं। लेकिन उनकी यह वापसी केवल एक सामान्य घर वापसी नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए ‘एक्शन चैप्टर’ की शुरुआत मानी जा रही है। दिल्ली पहुंचते ही तेजस्वी ने जिस तरह देर रात लालू प्रसाद यादव के साथ बंद कमरे में घंटों मंथन किया, उसने यह साफ कर दिया है कि आरजेडी अब ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा से बाहर निकलकर ‘अटैक मोड’ में आने वाली है। लालू यादव का तजुर्बा और तेजस्वी की नई सोच क्या आरजेडी को फिर से नंबर वन की रेस में मजबूती से खड़ा कर पाएगी? यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।

चुनौतियों का पहाड़ और तेजस्वी का ‘रिबूट’ प्लान
तेजस्वी की अनुपस्थिति में बिहार की सत्ताधारी एनडीए (NDA) ने उन पर ‘पलायन’ का ठप्पा लगाने की पूरी कोशिश की। अब तेजस्वी के सामने सबसे बड़ी चुनौती न सिर्फ इन आरोपों को धोना है, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उस उत्साह को फिर से जीवित करना है, जो पिछले कुछ समय से सुस्त पड़ा था।

आइये यहां हम उन 3 मुख्य चुनौतियों पर बात करेंगे, जो तेजस्वी के टेबल पर सबसे ऊपर हैं :-

  1. संगठन का पुनर्गठन: सच कहा जाए तो राजद को ‘सर्जरी’ की जरूरत है। पार्टी के भीतर लंबे समय से बड़े बदलावों की चर्चा है। चुनाव परिणामों के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद अब तेजस्वी को संगठन में ‘युवा जोश’ और ‘पुराने अनुभव’ के बीच संतुलन बनाना होगा। सूत्र बताते हैं कि लालू-तेजस्वी की बैठक में जिला स्तर पर सांगठनिक फेरबदल की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
  2. नैरेटिव की लड़ाई: ‘गायब’ होने के ठप्पे को मिटाना भी तेजस्वी के लिए एक चुनौती है। विपक्ष (BJP-JDU) ने तेजस्वी के विदेश दौरे को जनता की समस्याओं से भागने वाला बताया है। इसके जवाब में आरजेडी अब एक बड़ी ‘जनसंपर्क यात्रा’ या ‘आंदोलन’ की तैयारी में है। तेजस्वी को साबित करना होगा कि उनकी ‘डिजिटल सक्रियता’ से ज्यादा उनकी ‘मैदानी मौजूदगी’ प्रभावी है।
  3. सदन से सड़क तक सरकार को घेरना: आगामी विधानसभा सत्र और उससे पहले बिहार के ज्वलंत मुद्दों (जैसे विशेष राज्य का दर्जा, अपराध और भ्रष्टाचार) पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार करनी होगी। तेजस्वी की कोशिश होगी कि वे खुद को बिहार की आवाज के रूप में पुनः स्थापित करें।