तेजस्वी–पप्पू साथ एक मंच पर! “दुश्मनी से समझौते” तक की कहानी, धमदाहा में गठबंधन का नया समीकरण

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
बिहार की राजनीति में एक समय के धुर विरोधी रहे तेजस्वी यादव और पप्पू यादव अब चुनावी मंच साझा कर रहे हैं। धमदाहा विधानसभा में राजद प्रत्याशी संतोष कुशवाहा के समर्थन में आयोजित रैली में दोनों नेता एक साथ दिखाई दिए।
यह तस्वीर न सिर्फ राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम देती है, बल्कि INDIA गठबंधन की अंदरूनी मजबूरियों और व्यावहारिक राजनीति को भी उजागर करती है। पप्पू यादव ने तेजस्वी के साथ अपनी पांच तस्वीर Facebook पर शेयर की है.
तेजस्वी और पप्पू यादव का एक मंच पर आना INDIA गठबंधन की मजबूरी भी है और रणनीति भी।
यह संदेश देने की कोशिश है कि व्यक्तिगत मतभेद से ऊपर “मोदी विरोधी गठबंधन” की एकता है।
कोसी–पूर्णिया बेल्ट में यह तालमेल यदि जमीनी स्तर पर काम कर गया, तो यह गठबंधन की उम्मीदों को नया उछाल दे सकता है।
लेकिन, रैली खत्म होने के बाद भी असली सवाल यही रहेगा… क्या यह दोस्ती मतदान तक ही सीमित रहेगी?
पुरानी रंजिश, नया मंच
तेजस्वी और पप्पू यादव के बीच तनाव और तकरार किसी से छिपी नहीं रही है।
कभी पप्पू यादव ने तेजस्वी को “अनुभवहीन” कहा था, वहीं 2020 में तेजस्वी को “जननायक” बताने पर पप्पू यादव को तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी।
इसके बावजूद, इस बार धमदाहा में दोनों एक मंच पर दिखे… यह संकेत है कि गठबंधन की राजनीति में व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर सामूहिक रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।

पप्पू यादव का पोस्ट… गठबंधन के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दे रहा है.
धमदाहा रैली के बाद पप्पू यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा…
“पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के धमदाहा विधानसभा अंतर्गत हाई स्कूल धमदाहा मैदान में आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी और इंडिया इन्क्लूसिव पार्टी के संस्थापक आईपी गुप्ता जी के साथ एक ऐतिहासिक चुनावी मंच साझा करने का अवसर मिला… मैंने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यायपूर्ण बिहार के संकल्प पर जनता से संवाद किया।”
इस पोस्ट के ज़रिए पप्पू यादव ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अब INDIA गठबंधन की सामूहिक लड़ाई में पूरी तरह शामिल हैं।

राजनीतिक अर्थ… “मजबूरी का मेल या रणनीतिक तालमेल?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंच साझा करना सिर्फ दिखावे का गठजोड़ नहीं है, बल्कि पूर्णिया–कोसी क्षेत्र में वोट ट्रांसफर की व्यावहारिक जरूरत है।
धमदाहा, कोसी और सीमांचल बेल्ट में पप्पू यादव का जनाधार मौजूद है।
वहीं, राजद इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है।
दोनों के एक साथ आने से गठबंधन को मुस्लिम–यादव–नॉन–Yadav पिछड़ा वर्ग (M–Y–OBC) समीकरण में मजबूती मिल सकती है।

भीतर की खींचतान बनी रहेगी…
हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह राजनीतिक “तस्वीर” स्थायी नहीं, बल्कि चुनावी गणित के तहत बना तालमेल है।
गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग, नेतृत्व और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर मतभेद आगे भी बने रह सकते हैं।

धमदाहा की जनता का मूड…
पप्पू यादव के अनुसार, धमदाहा की जनता ने “विकास, रोजगार और न्याय” की राजनीति के पक्ष में माहौल बनाया है।
लेकिन स्थानीय समीकरणों में यह भी देखा जा रहा है कि संतोष कुशवाहा को जिताने के लिए पप्पू यादव की सक्रियता से गठबंधन को बड़ा लाभ मिल सकता है, खासकर यादव–कुशवाहा और अति पिछड़े मतदाताओं के बीच।