मां स्कंदमाता की आराधना से गुंजायमान हुआ सुपौल

तोरण द्वारों से सजा शहर, महाआरती में उमड़ी महिलाओं की भीड़

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन जिला पूरी तरह मां की भक्ति में सराबोर नजर आया। पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना ने मंदिरों को अलौकिक छटा से भर दिया। सुबह से ही श्रद्धालु माता के दर्शन को उमड़ पड़े। दुर्गा सप्तशती के पाठ और “या देवी सर्वभूतेषु” मंत्रोच्चार से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
सुबह और शाम दोनों समय मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाएं परंपरागत परिधान में सजकर महाआरती में सबसे आगे नजर आईं। दीपक थामे सामूहिक रूप से जब उन्होंने मां की स्तुति की, तो पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया। बच्चे और युवा भी माता की प्रतिमाओं के समक्ष फूल और प्रसाद चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त करते रहे।

सुपौल शहर का श्रृंगार भी देखने लायक रहा। मुख्य मार्गों और चौक-चौराहों पर भव्य तोरण द्वार बनाए गए। दूधिया रोशनी और सजावट से जगमगाते मंदिरों व पंडालों ने शहर को देवी नगरी का रूप दे दिया। शाम ढलते ही सड़कों पर भीड़ बढ़ने लगी और हर ओर मां के जयकारों की गूंज सुनाई दी।

गांवों में भी नवरात्र का उल्लास चरम पर है। परदेस में रहने वाले लोग घर लौटकर परिवार संग मां की पूजा में शामिल हुए। गांवों में रिश्तेदारों और मित्रों के मिलन से पर्व की रौनक और बढ़ गई। हर घर में देवी गीत गूंज रहे हैं और मां के लिए विशेष भोग तैयार किए जा रहे हैं।

मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से संतान सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी कारण मंदिरों में महिलाओं की भीड़ विशेष रूप से देखने को मिली। उनकी आंखों में मां के प्रति अटूट आस्था और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना साफ झलक रही थी।

नवरात्र का यह पांचवां दिन सुपौल के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम साबित हुआ। मां स्कंदमाता की महिमा से सजा यह दिन लोगों के हृदयों में गहरी छाप छोड़ गया। जिला मुख्यालय स्थित सावर्जनिक पूजा स्थल गांधी मैदान, बड़ी दुर्गा स्थान नयानगर, रेलवे माल गोदाम सहित बसबिट्टी , सुखपुर, बकौर, परसरमा, बरेल , बरुआरी पूरब और पश्चिम, लौकहा, वीणा, करिहो , पथरा, निर्मली, पिपरा , डभारी बभनी, किशनपुर, सरायगढ़, मरौना, निर्मली, राघोपुर, वीरपुर, छातापुर, त्रिवेणीगंज, जदिया, प्रतापगंज ,करजाइन सहित कई जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर धूमधाम से पूजा की जाती है। मौके पर धार्मिक कार्यक्रम और भगवती जागरण और मेला का आयोजन किया गया है। आकर्षक ढंग से पूजा पंडाल को सजाया गया है।