एम आशा ऐप पर शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश, लापरवाही पर होगी प्रोत्साहन राशि में कटौती

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित अनुमंडलीय अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे दैनिक कार्यों की प्रविष्टि सरकार के निर्देश पर ‘एम आशा ऐप’ के माध्यम से नियमित रूप से अपलोड कराना सुनिश्चित करना था। ज्ञात हो कि इस कार्य की जिला स्तर पर समीक्षा उप विकास आयुक्त सारा अशरफ द्वारा की गई । समीक्षा के दौरान पाया गया कि सुपौल जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगभग 25 प्रतिशत आशा कार्यकर्ताओं द्वारा अपने दैनिक कार्यों की प्रविष्टि ‘एम आशा ऐप’ पर नहीं की जा रही है। इस पर उप विकास आयुक्त ने सभी प्रखंडों को निर्देशित किया कि संबंधित आशा कार्यकर्ताओं को बुलाकर कड़ी चेतावनी दी जाए तथा शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित कराई जाए। इसी क्रम में मंगलवार को त्रिवेणीगंज प्रखंड अंतर्गत बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि प्रखंड की कुल 56 आशा कार्यकर्ताओं ने फरवरी माह में अब तक ‘एम आशा ऐप’ पर एक भी प्रविष्टि नहीं की है। ऐसी सभी आशा कार्यकर्ताओं को बैठक में कड़ी चेतावनी दी गई। साथ ही, उन्हें एक-एक प्रविष्टि कराकर ऐप के उपयोग की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से समझाई गई तथा ‘एम आशा ऐप’ के संचालन संबंधी विस्तृत प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। बैठक में प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद एवं यूनिसेफ के बीएमसी किशोर कुमार ने संयुक्त रूप से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और ऐप से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि भविष्य में इस कार्य में लापरवाही बरतने वाली आशा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी तथा उनकी प्रोत्साहन राशि में कटौती भी की जा सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में आश्विन ऐप के माध्यम से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 1 अप्रैल 2026 से ‘एम आशा ऐप’ से लिंक कर दिया जाएगा। यदि आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से ‘एम आशा ऐप’ पर दैनिक प्रविष्टि नहीं करेंगी, तो राज्य स्तर से ही उनकी प्रोत्साहन राशि में स्वाभाविक रूप से कटौती हो जाएगी।
बैठक के अंत में सभी आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता एवं नियमितता के साथ करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।