तेजप्रताप के तेवर सियासी भूचाल : सोशल मीडिया से दिखी लालू परिवार की अंदरूनी दरार

देखना है कि तेजप्रताप किस ओर बढ़ते हैं… सुलह की राह पर या राजनीतिक बगावत। यही आरजेडी का भविष्य भी तय करेगा।

न्यूज स्कैन डेस्क, पटना
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर उफान मारता पारिवारिक संघर्ष अब सार्वजनिक हो गया है। तेजप्रताप यादव की हालिया गतिविधियां, खासकर सोशल मीडिया पर, इस बात की ओर साफ इशारा करती हैं कि परिवार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। एक वायरल तस्वीर से शुरू हुआ विवाद अब पार्टी नेतृत्व और पारिवारिक रिश्तों के बुनियादी ताने-बाने को झकझोर रहा है। तेजप्रताप यादव की अनुष्का यादव के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तस्वीर के कथित ‘संदेश’ को लेकर जब पार्टी में चर्चा बढ़ी, तो लालू प्रसाद यादव ने तेजप्रताप को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी और परिवार से बाहर करने का ऐलान कर दिया। यह अनपेक्षित था। यह फैसला जिस तरीके से सार्वजनिक किया गया, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
तेजप्रताप कुछ दिनों तक खामोश रहे। उन्होंने इस पूरे मामले में कहीं भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मीडिया से भी दूरी बनाए रखा। कुछ दिन बाद तेजप्रताप ने चुप्पी तोड़ने के साथ जो प्रतिक्रिया दी वह कुछ और संकेत दे गई। तेजप्रताप ने कहा, “पिताजी सोशल साइट थोड़े चलाते हैं।” यह संकेत था कि लालू की ओर से आया पोस्ट किसी और की स्क्रिप्टिंग थी।

इमोशनल कार्ड और फिर आक्रामक तेवर

इसके बाद तेजप्रताप ने अपने पिता लालू यादव के साथ एक इमोशनल फोटो साझा की, जिससे लगा कि रिश्तों में कुछ नरमी आ गई है। लेकिन यह राहत क्षणिक साबित हुई। तेजप्रताप ने फिर से आक्रामक लहजा अपनाते हुए कहा कि वे जल्द ही बताएंगे कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन साजिशकर्ता है। तेजप्रताप ने अब राजद और अपने परिवार के कई सदस्यों को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया है। इसमें उनकी बहनें मीसा भारती और राजलक्ष्मी भी शामिल हैं। खास बात यह है कि उन्होंने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को फॉलो करना जारी रखा है। पहले जहां वे 19 लोगों को फॉलो करते थे, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है।

विरासत की राजनीति और ‘सेकंड लाइन’ का संकट

यह पूरा विवाद उस वक्त सामने आया है जब आरजेडी को नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव पार्टी के निर्विवाद चेहरे बन चुके हैं, जबकि तेजप्रताप को लंबे समय से हाशिए पर धकेला गया है। विरोध की यह नई डिजिटल शैली है। सोशल मीडिया पर अनफॉलो करना भी ‘राजनीतिक स्टेटमेंट’ बन चुका है। निश्चित तौर पर तेजप्रताप का यह कदम बताता है कि संघर्ष केवल विचारों का नहीं बल्कि विरासत के दावे का भी है। राजद के भीतर यह पहला मौका नहीं है जब तेजप्रताप ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई हो। लेकिन इस बार का स्वर और तरीका यह इशारा कर रहा है कि बात महज असहमति तक सीमित नहीं है।

राजद की सार्वजनिक छवि को झटका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह विवाद लंबा खिंचा, तो तेजस्वी के नेतृत्व को भले कोई खतरा न हो, लेकिन पार्टी की सार्वजनिक छवि को झटका जरूर लगेगा। यह भी तय है कि तेजप्रताप ने यदि खुद को संगठन से दूर कर लिया, तो यह आने वाले चुनावों में वोट बैंक के भीतर भ्रम और विभाजन की वजह बन सकता है। लालू परिवार की यह लड़ाई अब घर की चारदीवारी से निकलकर सोशल मीडिया वॉल पर फैल चुकी है। यह सिर्फ एक पारिवारिक मतभेद नहीं, बल्कि नेतृत्व की ‘मान्यता’ और ‘स्वीकृति’ को लेकर चल रही अंदरूनी लड़ाई है। देखना है कि तेजप्रताप किस ओर बढ़ते हैं… सुलह की राह पर या राजनीतिक बगावत। यही आरजेडी का भविष्य भी तय करेगा।