गर्मी से पहले ही पानी का संकट: कैमूर के भरीगांवा में नल-जल योजना फेल, ग्रामीण आज भी कुएं और पोखर के पानी पर निर्भर

भभुआ प्रखंड के रतवार पंचायत के वार्ड 14 और 15 में 700–800 घरों के लोग साफ पानी के लिए तरस रहे, पाइप बिछा पर नलों में नहीं आया पा

प्रमोद कुमार, कैमूर

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के बावजूद कैमूर जिले के कई गांवों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। भभुआ प्रखंड के रतवार पंचायत स्थित भरीगांवा गांव में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की किल्लत गहरा गई है। यहां के ग्रामीण आज भी कुएं, पोखर और दूसरे घरों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन अब तक उसमें पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप वार्ड संख्या 14 और 15 के करीब 700 से 800 घरों के लोग साफ पानी के लिए जूझ रहे हैं।

चापाकल भी दे रहे जवाब

गर्मी की शुरुआत के साथ ही गांव के कई चापाकल सूखने लगे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि जब अभी यह स्थिति है, तो भीषण गर्मी पड़ने पर पानी का संकट और गंभीर हो सकता है।

ग्रामीणों ने बताई समस्या

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान गांव की सुराही देवी, सोनमती देवी और शिवनाथ बिंद ने बताया कि गांव में पानी की भारी समस्या है। कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। मजबूरी में लोग कभी किसी के घर से पानी लेते हैं तो कभी कुएं या पोखर का पानी पीते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।

वार्ड सदस्य ने उठाए सवाल

भरीगांवा गांव के वार्ड सदस्य सुशील कुमार ने बताया कि इलाके में पानी का स्तर करीब 300 फीट नीचे चला गया है, जिससे अधिकांश लोग बोरिंग नहीं करा पाते। गांव के कुछ सक्षम लोगों के निजी बोरिंग से ही ग्रामीण पानी लेकर पीते हैं, जबकि मवेशियों के लिए पोखर से पानी लाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि पीएचईडी विभाग से लगातार अनुरोध के बाद वार्ड 14 और 15 में दो पानी टंकी स्वीकृत हुई और पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन अब तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। एक टंकी से सीमित लोगों को पानी मिल रहा है, जबकि दूसरी योजना अभी तक चालू नहीं हो पाई है।

प्रशासन ने शुरू किया मरम्मत अभियान

इधर, भीषण गर्मी को देखते हुए कैमूर के जिलाधिकारी ने हाल ही में चापाकल मरम्मत दल को सभी प्रखंडों में रवाना किया है। जिले में 2164 चापाकलों की मरम्मत कर उन्हें चालू करने की योजना बनाई गई है, ताकि गर्मी के दिनों में लोगों को पानी की परेशानी न हो।

कई गांवों में पानी का संकट

बताया जाता है कि कैमूर जिले के अधौरा पहाड़ी क्षेत्र के 108 गांवों में आज भी पेयजल की समस्या बनी हुई है। भरीगांवा जैसे कई गांवों में नल-जल योजना लागू होने के बावजूद लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।