न्यूज स्कैन ब्यूरो, लखीसराय
गंगा, हरूहर और सहायक किऊल नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से लखीसराय जिले का पिपरिया प्रखंड बाढ़ की चपेट में आ गया है। पानी के तेजी से फैलाव के कारण कई गांव जलमग्न हो चुके हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
गांवों में घुसा पानी
रामचन्द्रपुर, वलीपुर, राहटपुर, रामनगर सहित आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घरों, गलियों और खेतों तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर आंगन और सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया है, जिससे ग्रामीणों को पानी में पैदल चलकर आना-जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में हर घंटे इजाफा हो रहा है और हालात और बिगड़ सकते हैं।
खेती-किसानी को भारी नुकसान
बाढ़ से निचले क्षेत्रों में लगी सोयाबीन और मकई की फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं। खेतों में लंबे समय तक पानी भरने से फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे की भारी किल्लत खड़ी हो गई है।
राहत कार्य की मांग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब तक प्रशासन की ओर से पर्याप्त राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हुए हैं। लोग नाव की व्यवस्था, पशुचारा और बाढ़ राहत शिविर खोलने की मांग कर रहे हैं। कई परिवार ऊंचे स्थानों और स्कूल भवनों में शरण लेने को मजबूर हैं।
पेयजल और स्वास्थ्य संकट
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीने के पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी हो गई है। दूषित पानी के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राहत सामग्री, दवाइयां और स्वच्छ पानी की तात्कालिक आपूर्ति की अपील की है।

































