न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 75वें जन्मदिन के अवसर पर राजधानी पटना में जहाँ एक ओर जश्न का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर भविष्य की राजनीति को लेकर एक बड़ी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री का पुरजोर समर्थन कर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी स्पष्ट कहा कि निशांत को राजनीति में आना चाहिए।
कुशवाहा का स्पष्ट संदेश: “हम स्वागत को तैयार”
उपेंद्र कुशवाहा ने दो टूक शब्दों में कहा कि निशांत कुमार को राजनीति में मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम तो पहले से कह रहे हैं कि उन्हें आना चाहिए। अगर वह आते हैं, तो हम उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।” हालांकि, कुशवाहा ने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला निशांत और उनके पिता नीतीश कुमार को ही लेना है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने कहा कि निशांत को राजनीति में आना चाहिए। सवाल यह है कि क्या निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाएगा… ये सारी बातें अभी भविष्य के गर्भ में हैं।
कुशवाहा के बयान के पीछे की रणनीति?
उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान महज एक शुभकामना नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक दूरदर्शिता का हिस्सा माना जा रहा है। जेडीयू के भीतर अक्सर ‘नंबर 2’ की कुर्सी को लेकर खींचतान की खबरें आती रही हैं। निशांत कुमार के आने से पार्टी में नेतृत्व को लेकर होने वाला संभावित बिखराव रुक सकता है। पटना की सड़कों पर लगे पोस्टर और जेडीयू कार्यकर्ताओं का उत्साह यह बताता है कि कैडर अब एक युवा चेहरे की तलाश में है जो नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ा सके। आरजेडी और अन्य दलों के युवा नेतृत्व के सामने जेडीयू के पास फिलहाल कोई चेहरा नहीं है। निशांत कुमार की सौम्य छवि पार्टी के लिए ‘ट्रंप कार्ड’ साबित हो सकती है।
निशांत कुमार: पर्दे के पीछे से मुख्यधारा तक?
निशांत कुमार अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर रहे हैं। आध्यात्मिक और शांत स्वभाव के धनी निशांत को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव में भी चर्चाएं थीं, लेकिन उन्होंने कभी सक्रियता नहीं दिखाई। मगर उपेंद्र कुशवाहा का बार-बार यह कहना कि “सरकार और पार्टी दोनों का संचालन एक साथ करना उचित नहीं”, सीधे तौर पर नीतीश कुमार को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने का इशारा है। नीतीश कुमार के जन्मदिन पर उमड़ा यह जनसैलाब और सहयोगियों का समर्थन इशारा कर रहा है कि जेडीयू के भीतर “मिशन निशांत” की पटकथा तैयार की जा रही है।


























