न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार चुनाव 2025 के नतीजे भले घोषित हो चुके हों, लेकिन इससे बड़ा झटका लालू परिवार के भीतर फूट के रूप में सामने आया है। पहले तेजप्रताप यादव का बागी तेवर और अब लालू की बेटी रोहिणी आचार्य का परिवार और राजनीति, दोनों से नाता तोड़ लेने का फैसला, RJD के भीतर गंभीर अस्थिरता के संकेत दे रहे हैं। सत्ता, रणनीति, पारिवारिक रिश्तों और गुटबाज़ी का यह तूफान अब खुलकर सड़क पर आ गया है। तेजप्रताप और रोहिणी दोनों ने यह बात समान रूप से कही है कि राजद और परिवार की बर्बादी में तेजस्वी के सलाहकार की भूमिका रही है। तेजप्रताप ने इन्हें “जयचंद” कहा और षड्यंत्रकर्ता बताया। रोहिणी ने इन्हें धमकी देने वाला बताया, जिसने उन्हें राजनीति और परिवार छोड़ने के लिए मजबूर किया। इन आरोपों का स्वर भले अलग हो, लेकिन संकेत एक ही देते हैं कि RJD के भीतर नेतृत्व का असल केंद्र अब सलाहकारों का छोटा लेकिन शक्तिशाली समूह बन गया है। तेजस्वी यादव सीधे इन आरोपों पर कम बोलते हैं, पर सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पार्टी के भीतर अब “सत्तात्मक निर्णय” परिवार के बजाय सलाहकारों की टीम के हाथों में खिसक रहा है।
तेजप्रताप एपिसोड : निष्कासन, ‘जयचंद’ और अलग मोर्चे की तैयारी
लालू प्रसाद यादव ने कुछ महीने पहले अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी और परिवार से ही निष्कासित कर दिया। कारण बताया गया था अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से बगावत।
लेकिन तेजप्रताप ने इस निष्कासन को सीधी राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने तेजस्वी यादव के बेहद करीबी सलाहकारों, विशेषकर संजय यादव पर “राजनीतिक षड्यंत्र” का आरोप लगाते हुए इन्हें “जयचंद” की संज्ञा दी।
तेजप्रताप का दावा था कि पार्टी के भीतर कुछ नेता जानबूझकर उन्हें हाशिये पर धकेलना चाहते हैं और उनकी राजनीतिक पहचान खत्म करने की योजना चला रहे हैं।
निष्कासन के बाद तेजप्रताप ने अपना अलग राजनीतिक मोर्चा बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया। कई छोटे दलों को साथ लेकर वे नई राजनीतिक इकाई खड़ी करने में जुट गए… मानो ये संकेत दे रहे हों कि RJD से बाहर किए जाने के बाद भी वे बिहार की राजनीति में अपने पांव जमाकर रहेंगे। चुनाव भी लड़े। ये बात और कि महुआ से वे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके।
रोहिणी एपिसोड : परिवार से निकाले जाने का आरोप, धमकियों का दावा, और राजनीति से संन्यास
चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने पार्टी और परिवार, दोनों से नाता तोड़ लेने का बड़ा फैसला किया। राबड़ी आवास से बाहर निकलते ही मीडिया से बातचीत करते हुए रोहिणी बेहद गुस्से में थीं। उनके शब्दों ने पूरे राजनीतिक माहौल को हिलाकर रख दिया… “मेरा कोई परिवार नहीं है। मुझे घर से निकाल दिया गया। सवाल पूछने पर गाली दी जाएगी। चप्पल से पिटवाया जाएगा। संजय यादव और रमीज ने कहा था कि मैं राजनीति छोड़ दूं… मैं पूरा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”
रोहिणी के आरोपों ने RJD की आंतरिक राजनीति को खोलकर रख दिया
उन्होंने दावा किया कि चुनाव हारने के बाद उनके सवाल पूछने से तेजस्वी के करीबी सलाहकार नाराज थे और उन्हीं लोगों ने उन्हें ‘परिवार से बाहर जाने’ के लिए प्रेरित किया। यह पहला अवसर नहीं जब रोहिणी ने परिवार से नाराज़गी जताई हो। 2024 में सारण लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही वे लगातार पार्टी और परिवार से दूरी बना रही थीं। उन्होंने लालू, तेजस्वी और RJD को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया था। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सिंगापुर लौट रही हैं, यानी सक्रिय राजनीति से उनका अध्याय समाप्त माना जा रहा है।
ये सवाल उठना लाजमी है कि RJD क्या परिवारवाद की लड़ाई में फंस गई है या परिवार ही अब RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है? बिहार की राजनीति में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी का इस तरह से टूटना सिर्फ RJD का संकट नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण मोड़ है। अगर यह कलह जारी रही, तो RJD भविष्य में कई हिस्सों में बंट सकती है… नेतृत्व के स्तर पर भी और संगठनात्मक ढांचे में भी। लालू परिवार का संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, राजनीतिक भी है। तेजप्रताप और रोहिणी, दोनों मामलों को सतही विवाद मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि RJD के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति है। सलाहकारों की ताकत एेसी बढ़ी कि परिवार और पार्टी दोनों बर्बादी की राह पर है। इसका असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि RJD की आने वाली पूरी राजनीति इसका इंपैक्ट झेलने को बाध्य होगी।


























