न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
रविवार का दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के इतिहास में एक बड़े बदलाव का गवाह बना। पार्टी के ‘भीष्म पितामह’ लालू प्रसाद यादव के मार्गदर्शन में तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया। 25 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हाथ उठाकर तेजस्वी के नेतृत्व पर मुहर तो लगा दी, लेकिन इस ‘ताजपोशी’ की खुशी कुछ ही घंटों में तब फीकी पड़ गई जब तेजस्वी की अपनी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोल दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक बहन की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के पुराने कैडर की वह आवाज है जो तेजस्वी की नई कार्यशैली से खुद को कटा हुआ महसूस कर रहे हैं। तेजस्वी पार्टी को कॉर्पोरेट स्टाइल और नए सलाहकारों के जरिए चलाना चाहते हैं, जबकि रोहिणी जैसे लोग पुराने ‘लालू स्टाइल’ के वफादारों को दरकिनार किए जाने से आहत हैं। रोहिणी का यह कहना कि ‘घुसपैठिए कामयाब हो रहे हैं’, इस ओर इशारा करता है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा ऐसा है जो मानता है कि तेजस्वी को गलत फीडबैक देकर पार्टी की जड़ें खोखली की जा रही हैं।
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि तेजस्वी के सामने चुनौती जितनी बाहरी है, उससे कहीं अधिक गहरी और गंभीर उनके घर के अंदर है।
- तेजस्वी का संकल्प: ‘झुकेंगे नहीं, फिर से राष्ट्रीय पार्टी बनाएंगे’
पदभार संभालते ही तेजस्वी यादव पुराने तेवर में नजर आए। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी राजनीति का रास्ता संघर्ष से होकर गुजरेगा।
केंद्र और राज्य पर प्रहार: तेजस्वी ने खुद को ‘साजिश का शिकार’ बताया और आरोप लगाया कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विपक्षी नेताओं को मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
EVM बनाम बैलेट: उन्होंने एक बार फिर लोकतंत्र की शुचिता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई।
राष्ट्रीय विस्तार: तेजस्वी का अगला मिशन राजद को केवल बिहार तक सीमित न रखकर फिर से ‘राष्ट्रीय पार्टी’ का दर्जा दिलाना और अन्य राज्यों में विस्तार करना है।
धनबल बनाम जनबल: उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार धनबल और सत्ताबल के जरिए जनमत को प्रभावित कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
- रोहिणी का ‘विद्रोह’: “घुसपैठियों के शहजादा को बधाई”
पार्टी में जहाँ एक तरफ जश्न का माहौल था, वहीं रोहिणी आचार्य के फेसबुक और ‘X’ पोस्ट ने राजद की आंतरिक गुटबाजी को चौराहे पर ला खड़ा किया। रोहिणी ने बिना नाम लिए तेजस्वी को “घुसपैठियों का शहजादा” और “कठपुतली” करार देकर सबको चौंका दिया।
रोहिणी का आरोप: “सियासत के शिखर पुरुष (लालू यादव) की गौरवशाली पारी का पटाक्षेप हो गया। ठकुरसुहाती करने वालों और साजिशकर्ताओं ने पार्टी पर कब्जा जमा लिया है।”
रोहिणी का मानना है कि पार्टी की कमान अब उन लोगों के हाथ में है जो ‘लालूवाद’ को खत्म करने के लिए विरोधियों द्वारा भेजे गए हैं। यह हमला सीधे तौर पर तेजस्वी की उस ‘कोर टीम’ पर है जो टिकट बंटवारे से लेकर रणनीतिक फैसलों तक तेजस्वी के सबसे करीब है।
तेजस्वी के लिए आगे की राह
ताजपोशी के बाद तेजस्वी के पास अब संवैधानिक रूप से पार्टी के सभी अधिकार हैं, लेकिन क्या वे ‘अपनों’ के विश्वास को जीत पाएंगे? एक तरफ उन्हें 2025 की हार के जख्मों को भरना है और दूसरी तरफ परिवार के भीतर सुलगती इस आग को शांत करना है। यदि वे रोहिणी और तेजप्रताप जैसे मुखर स्वर को शांत नहीं कर पाए, तो ‘राष्ट्रीय पार्टी’ बनने का उनका सपना आंतरिक कलह की भेंट चढ़ सकता है।



























