न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के आम नागरिकों के लिए जमीन-जायदाद से जुड़ी एक बड़ी राहत भरी खबर है… अब आपको अपने दादा-परदादा के समय के पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज (केवाला) निकालने के लिए निबंधन कार्यालयों की धूल नहीं फांकनी होगी। जून महीने से वर्ष 1908 से लेकर अब तक के सभी रजिस्ट्री पेपर ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएंगे।
आम आदमी को क्या होगा सीधा लाभ?
महीनों का काम मिनटों में: पहले पुराने दस्तावेज निकालने के लिए मैनुअल आवेदन देना पड़ता था और लोग महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाते थे। अब यह काम ऑनलाइन कुछ ही मिनटों में हो जाएगा।
भ्रष्टाचार पर लगाम: बिचौलियों और दलालों की जरूरत खत्म होगी क्योंकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी और डिजिटल होगी।
हर जगह मान्य: ऑनलाइन डाउनलोड किया गया यह ‘ई-रजिस्ट्री’ पेपर सरकारी और निजी, दोनों तरह के कार्यों में पूरी तरह वैध होगा।
कितना लगेगा शुल्क और कैसे होगा डाउनलोड?
दस्तावेज डाउनलोड करने के लिए सरकार ने 600 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है।
वेबसाइट: आवेदक को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://nibandhan.bihar.gov.in पर जाना होगा।
लॉगिन: नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के जरिए लॉगिन करना होगा।
डेटा एंट्री: जमीन का खाता नंबर, प्लॉट नंबर और अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज करनी होंगी।
पेमेंट: ₹600 का ऑनलाइन शुल्क जमा करते ही ई-रजिस्ट्री पेपर डाउनलोड करने का विकल्प मिल जाएगा।
ये हैं खास बातें… ये भी जान लीजिए
1908 से 1990: इस कालखंड के (82 वर्षों के) दस्तावेजों की स्कैनिंग का काम अंतिम चरण में है, जो जून तक पूरा हो जाएगा।
1990 से 2005: इन वर्षों के रजिस्ट्री पेपर पहले ही स्कैन होकर अपलोड किए जा चुके हैं।
2006 से अब तक: वर्ष 2006 के बाद से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले से ही कंप्यूटराइज्ड है, इसलिए ये दस्तावेज ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं।
वर्तमान में राज्य के 141 निबंधन कार्यालयों में 6 करोड़ से अधिक दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से डिजिटल तिजोरी में सुरक्षित किया जा रहा है।
































