न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं, लेकिन परीक्षा के पहले दिन से ही सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे हैं जो विचलित करने वाले हैं। देरी से पहुंचने के कारण परीक्षा केंद्र के गेट बंद होने और छात्राओं के बिलखते हुए वीडियो पर अब पूर्णिया स्थित विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल के सचिव और प्रख्यात शिक्षाविद राजेश मिश्रा ने बड़ी पहल की है। उन्होंने छात्र हित में सरकार को एक ‘संवेदनशील’ समाधान सुझाया है।
क्या है राजेश मिश्रा का सुझाव?
राजेश मिश्रा ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन परीक्षार्थियों का पहला पेपर छूट गया है, उन्हें एक और मौका देते हुए उस परीक्षा को अंत में दोबारा आयोजित करवाया जाना चाहिए। श्री मिश्रा ने कहा है कि सोशल मीडिया पर तैर रहे वीडियो में सबसे अधिक लड़कियां हैं, जो कड़े नियमों के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गईं। यदि सरकार तुरंत यह घोषणा कर देती है कि छूटा हुआ पेपर अंत में दोबारा होगा, तो परीक्षार्थी अपना साल बर्बाद होने के डर से मुक्त होकर आगे के विषयों की परीक्षा शांति से दे सकेंगे। उन्होंने कहा है कि, परीक्षा की शुचिता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन ट्रैफिक या अन्य कारणों से चंद मिनटों की देरी किसी छात्र का पूरा भविष्य खराब करने वाली नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं ‘दुखद’ वीडियो
बता दें कि बिहार बोर्ड के नए नियमों के तहत परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग टाइम के बाद प्रवेश वर्जित है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें छात्र और छात्राएं परीक्षा केंद्र की दीवार फांदते या गेट पर सिर पटककर रोते हुए दिख रहे हैं। शिक्षाविद राजेश मिश्रा का मानना है कि एक शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर देना होना चाहिए। राजेश मिश्रा के इस पोस्ट ने एक नई बहस छेड़ दी है। अभिभावकों और शिक्षाविदों का मानना है कि यदि सरकार इस सुझाव पर विचार करती है, तो हजारों गरीब और मेधावी छात्रों का भविष्य ‘ड्रॉप आउट’ होने से बच सकता है।



























