न्यूज स्कैन ब्यूरो सुपौल/ राघोपुर
राघोपुर थाना की पुलिस को बिना रिश्वत लिए लोगों की शिकायत दर्ज नहीं करना पड़ा महंगा। यह मामला राघोपुर थाना क्षेत्र के आम जनता की आवाज है। 11 मई को राघोपुर थाना क्षेत्र के देवीपुर पंचायत के जहलीपट्टी गांव में एक शादी समारोह में बारात में शामिल होने पहुंचे एक व्यक्ति का ब्ल्यू रंग का ग्लैमर बाइक चोरी हो गया । जिसे लेकर पीड़ित बाइक मालिक ने बिगत 12 मई को राघोपुर थाना में लिखित आवेदन देकर मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए बाइक बरामद करने का गुहार लगाई थी। जिस आवेदन में पीड़ित ने बाइक चोरी करने वाले दो आरोपी का भी नाम आवेदन में दिया था। थाना में दिए आवेदन में बाइक मालिक राघोपुर थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव निवासी मिथलेश कुमार ने बताया कि वह बीते 11 मई को दौलतपुर निवासी एक व्यक्ति के शादी समारोह में जहलीपट्टी गांव बारात गया था। इस दौरान वह खाना खाने के बाद अपने घर जाने के लिए बाइक के पास पहुंचा तो उनका बाइक का चाभी कहीं खो गया था। उसके बाद वह चाभी का काफी खोजबीन किया लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। दूसरे दिन 12 मई को वह बाइक का दूसरी चाभी लाने के लिए अपने घर चला गया। जब वह घर से चाभी लेकर अपने बाइक के पास पहुचा तो उनका बाइक वहां से गायब हो गया था। उसके बाद स्थानीय स्तर पर लोगों से उसे जानकारी मिली कि बारात में आए प्रतापगंज थाना क्षेत्र के श्रीपुर गांव निवासी महेंद्र मुखिया के पुत्र मनीष कुमार मुखिया और सितभर निवासी परमानंद यादव के पुत्र अखिलेश कुमार ने उनकी बाइक चोरी कर भाग निकला। मामले में जानकारी देते पीड़ित बाइक मालिक मिथलेश कुमार ने बताया कि वह राघोपुर थाना में बीते 12 मई को पहले हस्तलिखित आवेदन दिया था ।दो दिन बाद जब वह थाना पहुंचा तो थानाध्यक्ष ने उसे आवेदन को टाइप कर देने को कहा, तो उन्होंने बीते 15 मई को पुनः आवेदन टाइप कर थानाध्यक्ष को दिया जिसका थाना से उसे रिसीविंग कॉपी भी दी गई थी। उसके बाद वह कई दिनों तक थाना का चक्कर काटता रहा लेकिन राघोपुर पुलिस पदाधिकारी हर दिन कुछ न कुछ बहाना बनाकर उसे थाना से लौटा दिया करता था। बताया कि उसके बाद कुछ जनप्रतिधि से पैरवी कराकर वह बीते 10 जून को थाना पर पहूंचकर थानाध्यक्ष से मिलकर बात करने का प्रयास किया तो पहले इनकार कर दिया। लेकिन किसी तरह मिला और उन्होंने थानाध्यक्ष को बताया की उनका बाइक अभी भी आवेदन में वर्णित आरोपियों के पास ही मौजूद है, तो थानाध्यक्ष ने उसे फटकार लगाते हुए एक गश्ती गाड़ी में बैठा दिया और गश्ती पुलिस को उनके चिन्हित स्थान पर जाने को कहा। उसके बाद राघोपुर थाना की पुलिस ने उनके बाइक खोजने अथवा प्रार्थमिकी दर्ज करने के नाम पर थाना का गाड़ी चला रहे एक निजी चालक के द्वारा उनसे 5 हजार रुपया रिश्वत का मांग कर दिया। लेकिन उन्होंने रुपया देने से मना कर दिया। हालांकि गश्ती में मौजूद पुलिस अधिकारी ने आरोपी के घर गया और आरोपी के पिता से मिलकर दोनों आरोपी को थाना भेजने की बात कह थाना लौट गया। उसके बाद पीड़ित लगातार प्रार्थमिकी के लिए थाना का चक्कर काटता रहा लेकिन उक्त मामले में राघोपुर पुलिस ने कोई प्रार्थमिकी दर्ज नहीं किया।
इस बीच बाइक चोरी होने के करीब 3 महीने बाद राघोपुर थाना की पुलिस ने उसी चोरी हुई बाइक पर लदी 239 बोतल नेपाली देशी शराब के साथ दो शराब तस्कर को राधानगर भिसी चौक के पास से गिरफ्तार कर लिया।
जिसे बाइक व शराब सहित थाना लाया गया। जहां बाइक सहित दोनों शराब तस्कर श्रीपुर निवासी सुशील कुमार और राधानगर निवासी निखिल कुमार के ऊपर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया। उसके बाद पुलिस ने बाइक मालिक की गिरफ्तारी के लिए अनुसंधान शुरू कर दिया। उक्त बात की जानकारी जब बाइक मालिक को मिली तो उन्होंने थाना से संपर्क किया तो राघोपुर थाना की पुलिस अधिकारी ने उसे जेल भेजने की धमकी देने लगा। जब उन्होंने थाना में दिए आवेदन का रिसीविंग कॉपी दिखाया तो थानाध्यक्ष नवीन कुमार की होश उड़ गया। उसके बाद राघोपर थानाध्यक्ष नवीन कुमार ने अपने ऊपर होने वाले विभागीय कार्यवाई के भय से खुद को कार्यवाई से बचाने के लिए अनान फानन में पीड़ित बाइक मालिक से एक दूसरा आवेदन लेकर बाइक चोरी के साढ़े तीन महीने बाद थाना में प्रार्थमिकी दर्ज किया।
इस बावत एसडीपीओ बीरपुर सुरेंद्र कुमार से पूछने पर बताया कि तीन महीने बाद प्रार्थमिकी दर्ज होना बहुत ही गलत है। बताया कि मामले में उसी समय तुरंत ही एफआईआर होनी चाहिए थी। वैसे यह कैस का अनुसंधानकर्ता सर्किल इन्स्पेक्टर है उसी को आगे का कार्यवाई करनी है।



























