न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
सीमांचल की राजनीति में शुचिता के प्रतीक, प्रखर वक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथ केजरीवाल की आज (17 दिसंबर) तीसरी पुण्यतिथि है। पूर्णिया के बौद्धिक, सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले केजरीवाल साहब को आज उनके चाहने वाले, विधि समाज और भारतीय जनता पार्टी परिवार भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
विश्वनाथ केजरीवाल केवल एक नाम नहीं, बल्कि पूर्णिया के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा थे। उन्होंने एक सफल अधिवक्ता के रूप में बार एसोसिएशन में अपनी धाक जमाई, तो वहीं भाजपा के एक समर्पित सिपाही के रूप में संगठन की जड़ें मज़बूत कीं। उनकी सांगठनिक क्षमता और बेदाग छवि का ही परिणाम था कि पार्टी ने उन्हें किशनगंज लोकसभा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौर में किशनगंज में भाजपा का झंडा बुलंद करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, जिसे उन्होंने बखूबी स्वीकार किया। बाद के दिनों में तमाम लोग स्व. केजरीवाल के आशीर्वाद से विधानसभा पहुंचे।
जनसंघ से भाजपा तक
स्व. केजरीवाल उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिन्होंने राजनीति को कभी ‘व्यवसाय’ नहीं, बल्कि ‘सेवा’ का माध्यम माना। वे जनसंघ के काल से ही राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे। पार्टी के भीतर वे एक अभिभावक की भूमिका में थे। भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के अनुसार, जब पार्टी के लिए ज़मीन तलाशना मुश्किल था, तब केजरीवाल जी की वाकपटुता और तर्कों ने सीमांचल में कमल खिलाने की आधारशिला रखी थी।
एक अधिवक्ता के रूप में उनकी पहचान ‘सत्यनिष्ठ’ और ‘तर्कशील’ वकील की रही। अन्य मीडिया इनपुट्स बताते हैं कि वे कानून को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि समाज के शोषित और वंचित तबके को न्याय दिलाने के लिए अक्सर निःशुल्क पैरवी भी करते थे। जूनियर वकीलों के लिए वे एक चलते-फिरते पुस्तकालय की तरह थे, जिन्होंने दर्जनों युवाओं को कानून की बारीकियां सिखाईं।
राजनीति और वकालत के शिखर पर होने के बावजूद उनका व्यक्तित्व बेहद सरल और सुलभ था। मारवाड़ी समाज के उत्थान से लेकर पूर्णिया के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक, उनकी उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती थी। वे एक ऐसे स्पष्टवादी नेता थे जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर आज जिले के विभिन्न संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें याद किया जा रहा है। उनके परिजनों और शुभचिंतकों का कहना है कि स्व. केजरीवाल द्वारा दिखाए गए सत्य, निष्ठा और सेवा के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पूर्णिया की मिट्टी ने एक ऐसा सपूत खोया है, जिसकी कमी हमेशा खलेगी।
सिद्धांतों की राजनीति और न्याय के पुरोधा थे विश्वनाथ केजरीवाल, तीसरी पुण्यतिथि पर नम आंखों से याद किए गए ‘वकील साहब’

































