जन सुराज के आत्ममंथन का दिन: चुनाव परिणामों के बाद प्रशांत किशोर भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन के मौन उपवास पर

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पश्चिम चंपारण
बिहार चुनाव के नतीजों के एक दिन बाद जन सुराज आंदोलन के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के ऐतिहासिक भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का प्रायश्चित मौन व्रत रखा। उन्होंने सुबह गांधी आश्रम पहुँचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया, जिसके बाद निर्धारित स्थान पर बैठकर मौन उपवास की शुरुआत की। यह मौन व्रत कल सुबह 11 बजे समाप्त होगा, जिसके बाद वे मीडिया और लोगों से संवाद करेंगे।
पार्टी की ओर से बताया गया कि प्रशांत किशोर का यह कदम चुनावी परिणामों के बाद आत्ममंथन और जन सुराज की कार्यप्रणाली की समीक्षा का हिस्सा है। चूँकि वे मौन व्रत पर थे, इसलिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने मीडिया को संबोधित किया।
“तीन साल पहले जो अभियान शुरू किया था, उसमें सफलता नहीं मिली” — मनोज भारती
जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि प्रशांत किशोर का मौन उपवास पिछले तीन वर्षों में हुए कार्यों के मूल्यांकन और उन कमियों के प्रायश्चित का प्रतीक है, जिनकी वजह से जन सुराज जनता तक अपना उद्देश्य स्पष्ट रूप से नहीं पहुँचा पाया।
उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षा, रोजगार एवं पलायन रोकने की दिशा में जन सुराज ने जो प्रयास किए थे, उन्हें मजबूती से जनता के सामने प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
“यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम लोगों को आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य पूरी स्पष्टता से न बता सके। आज का मौन व्रत इसी आत्मचिंतन का प्रतीक है,”—उन्होंने कहा।
“जन सुराज फिर से जनता के बीच जाएगा, संघर्ष जारी रहेगा”
मनोज भारती ने आगे कहा कि जन सुराज फिर से बिहार की जनता के बीच जाएगा और लोगों को आंदोलन का स्पष्ट उद्देश्य बताएगा।
उन्होंने कहा — “यह आंदोलन परिवर्तन के लिए था और रहेगा। जो लोग सत्ता में आए हैं, हम उनके प्रति जनता की उम्मीदों की रक्षा करने के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे। हमारी भूमिका सशक्त विपक्ष की तरह होगी ताकि बिहार की जनता को किसी भी तरह का धोखा न मिले।”
ऐतिहासिक भितिहरवा में PK का मौन व्रत बना चर्चा का केंद्र
महात्मा गांधी के कर्मस्थल रहे भितिहरवा आश्रम में प्रशांत किशोर का यह मौन उपवास दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने आश्रम में पहुँचकर इस पहल को आत्ममंथन और लोकतांत्रिक राजनीति में नई शुरुआत के रूप में देखा।
प्रशांत किशोर कल मौन व्रत समाप्त करने के बाद मीडिया से बातचीत करेंगे, जिसमें वे आगे की रणनीति और जन सुराज की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।