न्यूज स्कैन डेस्क, पटना
बिहार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। उन्होंने कहा कि “घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर देश का भविष्य तय नहीं करने देंगे।” इसके साथ ही उन्होंने डेमोग्राफी मिशन का जिक्र कर राष्ट्रीय राजनीति में नया एजेंडा सेट कर दिया। इस समय बिहार में महागठबंधन SIR मुद्दे को लेकर यात्रा पर है। विपक्ष एनडीए व चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहा है। ऐसे माहौल में मोदी ने ‘डेमोग्राफी मिशन’ का ऐलान कर दिया। यह सीधे-सीधे विपक्षी नैरेटिव को चुनौती देने जैसा है।
यह बयान सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की राजनीति को भी प्रभावित करेगा, जहां लंबे समय से अवैध घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन का मुद्दा गरमाया रहता है।
क्या है डेमोग्राफी मिशन?
मोदी के भाषण में जिस ‘डेमोग्राफी मिशन’ का जिक्र आया, वह अवैध घुसपैठियों की पहचान और उन्हें रोकने पर केंद्रित बताया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य है, सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना। अवैध घुसपैठियों को रोककर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपने सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना। अगर राजनीतिक दृष्टि से कहें तो यह सीधे तौर पर विपक्ष के वोट बैंक पर सीधा-सीधा प्रहार है।
बिहार का सीमांचल बना बड़ा मुद्दा
बिहार का सीमांचल इलाका (कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया) पहले से ही डेमोग्राफी के असंतुलन को लेकर चर्चा में है। यहां मुस्लिम आबादी का अनुपात लगातार बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह बयान सीधे सीमांचल की राजनीति को टारगेट करता है, जहां आने वाले चुनाव में सीटों पर निर्णायक असर पड़ सकता है। उपलब्ध प्रामाणिक अध्ययनों/आंकड़ों में सीमांचल में मुसलमान आबादी का उच्च अनुपात दर्ज है, जैसे किशनगंज – 68%, कटिहार – 44–45%, अररिया – 44%, पूर्णिया – 38% (अंतरित स्रोतों में 2001/2011 और हालिया स्टेट-ऑफ़-द-रिज़न/ADRI रिपोर्ट का संदर्भ)। इन इलाकों में मुस्लिम इलाकों में घुसपैठ का मुद्दा गंभीर है। यह राजनीतिक तौर पर भी लगातार चर्चा में रहता है।
वहीं एक पहलू यह भी है कि सीमांचल के मुसलमानों का आरोप है कि उन्हें बेवजह बंग्लादेशी घुसपैठिया बताकर उद्देश्यपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। लेकिन हाल में ही आई एक रिपोर्ट के मुताबिक किशनगंज में आधार सेचुेशन 126%, कटिहार और अररिया में 123% और पूर्णिया में 121% तक रिपोर्ट की गई। यह आंकड़े जनसंख्या से ज्यादा हैं। निश्चित तौर पर यह नागरिकता को लेकर एक प्रश्न तो खड़ा करता ही है। एसआईआर के दौरान अररिया में 1.58 लाख, किशनगंज में 1.45 लाख, पूर्णिया में 2.73 लाख और कटिहार में 1.84 लाख नाम हटाए गए हैं।
राष्ट्रीय राजनीति पर असर
मोदी का यह बयान आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ असम और बंगाल की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बना सकता है। विपक्षी दल जहां इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बताएंगे, वहीं एनडीए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन का प्रश्न बनाकर चुनावी मैदान में उतरेगा।


























