कागजों में सड़क… हकीकत में जर्जर-दलदल: ठेकेदार और इंजीनियर ने मिलकर जनता के 1.85 करोड़ रुपए डकार लिए

  • शाहकुंड में 1.58 करोड़ की किरनपुर–डोहराडीह सड़क बनी भ्रष्टाचार का स्मारक, 27 लाख मेंटेनेंस की रकम भी ठेकेदार और इंजीनियर ने हड़पा
  • भूधरनी गांव के पास तो सड़क सबसे खराब, चार पुलिया, फ्लैंक, ड्रेनेज, बांध… सबकुछ अधूरा। कागजों में फाइल बंद, ज़मीन पर कुछ नहीं

मदन, भागलपुर

जिले के शाहकुंड प्रखंड की किरनपुर–डोहराडीह सड़क मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ योजना के भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत हैं। कागजों पर सड़क पूरी, हकीकत में आधी-अधूरी और जर्जर -दलदल में तब्दील।
28 जून 2023 को इस सड़क निर्माण शुरू हुआ, 27 मार्च 2024 तक काम पूरा होना था। लागत 1 करोड़ 58 लाख रुपये और 5 साल तक देखरेख के लिए 27 लाख रुपये अलग से। लेकिन डेढ़ साल बाद भी सड़क अधूरी है। सवाल उठता है – इतना पैसा गया कहां?
ग्रामीण गुस्से में कहते हैं – “बरसात में सड़क पर चलना मौत को दावत देने जैसा है। आधा-अधूरा निर्माण कर ठेकेदार फरार हो गया।”

भूधरनी गांव के पास तो सड़क दलदल में धंस चुकी है। चार पुलिया, फ्लैंक, ड्रेनेज, बांध… सबकुछ अधूरा है। कागजों में फाइल बंद, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ है। सड़क सुरक्षा के नाम पर भी घोर लापरवाही बरती गई है। ढाई किलोमीटर की इस सड़क पर छह खतरनाक मोड़ हैं। साइनेज और रोड मार्किंग नदारद, नतीजा – गाड़ियां पलटती हैं, बाइकर्स-टेंपो चालक हादसों का शिकार होते हैं। शाम ढलते ही लोग सड़क पर निकलने से डरते हैं।

5 साल तक करना था मेंटेनेंस, लेकिन ठेकेदार झांकने भी नहीं गया

इतना ही नहीं इस सड़क का ठेकेदार को पांच साल तक मेंटेनेंस भी करना था। लेकिन हालत यह है कि दो साल से ठेकेदार झांकने भी नहीं आया है। इससे भी चिंताजनक स्थिति यह है कि ग्रामीण कार्य विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से लेकर जूनियर इंजीनियर तक को सड़क निर्माण की निगरानी करनी थी। लेकिन स्थिति यह है कि उनलोगों ने एक बार भी स्थल पर जाकर निरीक्षण नहीं किया। ऐसे हालात में ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत से डोहराडीह-किरणपुर की सड़क बर्बाद हो गई। यह सड़क सबसे खराब भूधरनी गांव के पास है। वहां भी सड़क आधी-अधूरी बनाकर छोड़ दी गई है। इसके साथ ही चार पुलिया का भी निर्माण करना था, लेकिन उसे भी सही ढंग से नहीं किया गया। इसके साथ ही फ्लैंक, ड्रेनेज के अलावा बांध का भी मेंटेनेंस करना था। लेकिन सारे काम कागज में पूरे किए गए, जमीन पर सबकुछ आधा-अधूरा किया गया।

सड़क सुरक्षा के नाम पर भी बरती गई घोर लापरवाही

इसके साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए साइनेज और रोड मार्किंग लगाए जाने थे, लेकिन इस पर कोई काम नहीं किया गया, नतीजा यह कि सिर्फ ढाई किलोमीटर लंबी यह सड़क इतनी घुमावदार है और 6 जगहों पर तीखा मोड़ होने की वजह से अक्सर गाड़ियां पलटते रहती है। साइनेज के अभाव में बाइकर्स और टेंपो चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। शाम ढलने के बाद लोग गाड़ी से कहीं आने-जाने से परहेज करते हैं। मजबूरी में जाने पर घरवालों को हादसे की चिंता सताते रहती है। लेकिन ठेकेदार और इंजीनियर को इसकी जरा भी परवाह नहीं है। सड़क निर्माण और मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ बहानेबाजी की जा रही है।
ठेकेदार से पूछो, तो उसका बेटा फोन पर कह देता है – “पिताजी बीमार हैं।” और विभागीय इंजीनियर? वही रटा-रटाया जवाब – “देखेंगे।”
ग्रामीणों का आरोप सीधा है – ठेकेदार और इंजीनियर की मिलीभगत में करोड़ों की लूट हुई है। जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद, अफसरों की जेबें भरीं और गांववाले आज भी कीचड़ में फंसे हैं।

बड़ा सवाल: आखिर कब तक ठेकेदार और अफसर मिलकर योजनाओं को लूटते रहेंगे?

यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं, यह खुला डाका है सरकारी योजना पर। सवाल यह है – आखिर कब तक ठेकेदार और अफसर मिलकर योजनाओं को लूटते रहेंगे, और कब तक ग्रामीण इस दलदल में मरते रहेंगे।

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