आपरेशन आरोग्य : एक दशक में स्वास्थ्य महकमा में साफ-सफाई की आड़ में 7.22 करोड़ रुपये का गोलमाल, महालेखाकार की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, आरटीआई कार्यकर्ता ने खोली पोल

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

  • सदर अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों से जुड़ा है यह मामला
  • अब तक साफ-सफाई मद में 7 करोड़ 22 लाख 81 हजार एक सौ साठ रुपये हुआ अधिक भुगतान
  • निविदा में कम दर की बोली लगाने वाले को किया गया दरकिनार।
  • एक माह में 5.73 लाख रुपये का होता रहा अवैध भुगतान।
  • आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने किया मामले का खुलासा

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टाॅलरेन्स नीति की चाहे जितने दावे राज्य सरकार कर ले लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि आज भी जिले के स्वास्थ्य महकमा में लूट की खुली छूट मिली हुई है। रविवार को त्रिवेणीगंज में आयोजित आरटीआई कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में आरटीआई कार्यकर्ता सह जनसुराज नेता अनिल कुमार सिंह ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि तीन दशक से भ्रष्टाचार मुक्त कोसी का अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसी कड़ी में वे परेशान आरोग्य’’ की शुरूआत कर रहे हैं जिसके तहत एक-एक कर स्वास्थ्य विभाग में चल रही लूट का पर्दाफाश किया जायेगा। श्री सिंह ने सवाल किया कि आखिर इस लूट को कौन संरक्षण दे रहा है और इस लूट में किस-किस की हिस्सेदारी है यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे।
क्या है मामला: जिला स्वास्थ्य समीति सुपौल द्वारा जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में आउट सोर्सिंग के तहत साफ-सफाई, मरीजों के खान-पान, कपड़ा धुलाई एवं जेनरेटर मद में 6 मई 2015 को निविदा आमंत्रित किया। इस निविदा में 8 निविदा दाताओं को सफल घोषित किया गया। इन लोगों के साथ 3 वर्ष के लिए 9 जुलाई 2018 तक एकरारनामा किया गया। पुनः डीएम सह अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा 14 जुलाई 2018 को निविदा के समय निर्धारित न्यूनतम दर पर संस्था को अगले एक वर्ष के लिए अनुबंध विस्तार दिया गया। अवधि समाप्त होने के तीन वर्ष बाद 22 नवंबर 2022 को पुनः निविदा निकाली गई। लेकिन जिला स्वास्थ्य समिति ने निविदा का निष्पादन नहीं कर निविदा को रद्द कर दिया। उसके बाद 20 नवंबर 2025 को जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा निविदा का प्रकाशन किया गया लेकिन इसे 26 नवंबर को रद्द कर दिया गया। इस प्रकार वर्ष 2015 से ही एक ही एजेंसी से काम लिया जाता रहा और इन 10 वर्षों में निविदा प्रकाशन और रद्द का खेल जारी रहा।
कम दर वाले के बदले अधिक दर वाले पर विभाग मेहरबान: महालेखाकार ने लिखा परीक्षा में पाया कि साफ-सफाई हेतु विभिन्न एजेंसी द्वारा अंकित दर में कृष्णा बागवानी विकास मिशन पूर्णिया का दर सबसे कम था इसमें जिला अस्पताल के लिए 0.91 पैसा, पीएससी के लिए 0.61 पैसा और एपीएससी के लिए 0.57 पैसा प्रतिवर्ग फीट प्रतिदिन की दर से निर्धारित था । लेकिन काम इसे नहीं देकर चेतन्य बिहार विकास मंच जिसका दर सबसे अधिक 03 पैसा प्रतिवर्ग फीट प्रतिदिन था उसे सबसे कम मानते हुए कार्य आवंटित कर दिया गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रतिमाह सरकार को 5 लाख 73 हजार 660 रुपये का नुकसान होने लगा। इस प्रकार अब तक 126 महीने में सरकार को 7 करोड़ 22 लाख 81 हजार 160 रुपये का चूना लग चुका है।
इन जगहों पर हुई साफ-सफाई की आड़ में लूट: प्रतिमाह हुए गबन की राशि की गणना की गई तो सदर अस्पताल में 2.45 लाख अनुमंडल अस्पताल त्रिवेणीगंज में 83 हजार 730 रुपया, अनुमंडल अस्पताल निर्मली में 74 अजार 640 रुपया पीएचसी भपटियाही में 27 हजार 180 रुपया, पीएचसी पीपरा में 24 हजार 450 रुपया, पीएचसी प्रतापगंज में 31 हजार 200 रुपया, पीएचसी बलुआ बाजार में 23 हजार 520 रुपया, पीएचसी बसंतपुर में 7 हजार 50 रुपया, पीएचसी राघोपुर में 17 हजार 280 रुपया, पीएचसी मरौना में 5 हजार 880 रुपया, पीएचसी छातापुर में 5 हजार 970 रुपया, पीएचसी निर्मली में 6 हजार 620 रुपया, पीएचसी सुपौल में 6 हजार 420 रुपया शामिल है।