‘समृद्धि यात्रा’ से पहले सड़कों का ‘डबल डोज’; क्या बिहार के ग्रामीण अर्थतंत्र की तस्वीर बदल पाएंगे नीतीश कुमार?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की राजनीति में ‘यात्राओं’ का अपना एक मनोविज्ञान रहा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस कला के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। अपनी आगामी ‘समृद्धि यात्रा’ से ठीक पहले, राज्य सरकार ने ग्रामीण सड़कों को ‘डबल लेन’ करने का जो दांव चला है, वह केवल बुनियादी ढांचे का विकास भर नहीं है, बल्कि ग्रामीण मतदाताओं के बीच ‘सुशासन’ के ब्रांड को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है।

संपर्क से ‘सुविधा’ की ओर: एक रणनीतिक बदलाव
पिछले दो दशकों में बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने करीब 1.20 लाख किलोमीटर सड़कों का जाल बिछाया है। लेकिन अब सरकार का ध्यान केवल ‘सड़क पहुंचाने’ पर नहीं, बल्कि ‘सड़क की क्षमता’ बढ़ाने पर है। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी द्वारा ‘सात निश्चय-3’ के तहत सड़कों को डबल लेन करने की घोषणा इस बात का संकेत है कि सरकार अब ग्रामीण इलाकों को सीधे तौर पर मुख्यधारा के बाजार (NH और SH) से तेज रफ्तार के साथ जोड़ना चाहती है।

राजनीतिक टाइमिंग और ‘समृद्धि यात्रा’
इस घोषणा की टाइमिंग बेहद अहम है। ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान मुख्यमंत्री जब गांव की चौपालों पर होंगे, तो उनके पास दिखाने के लिए केवल ‘कनेक्टिविटी’ का पुराना रिकॉर्ड नहीं, बल्कि ‘डबल लेन’ का भविष्य का विजन भी होगा।

मेंटेनेंस पॉलिसी: सड़कों को बनाकर भूल जाने वाली छवि को तोड़ने के लिए 7 साल की मेंटेनेंस पॉलिसी को शामिल करना एक परिपक्व प्रशासनिक कदम है।

लक्ष्य: 2025-26 तक 43,431 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य यह बताता है कि सरकार आगे राजनीतिक फायदा लेने की तैयारियों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती।

विकास का ‘टोला’ मॉडल
मंत्री अशोक चौधरी ने साफ किया है कि फिलहाल फोकस उन टोलों पर है जो अब तक बारहमासी सड़कों से अछूते थे। ‘ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना’ के जरिए 4,643 टोलों को जोड़ना सामाजिक न्याय के उस विजन का हिस्सा है, जहां विकास की रोशनी अंतिम पायदान तक पहुंचाने का दावा किया जाता रहा है।