न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
नव वर्ष के अवसर पर कला केंद्र परिसर में सांस्कृतिक समन्वय समिति की ओर से नव वर्ष सांस्कृतिक मेला 2026 का आयोजन किया गया। विविध कला विधाओं, लोक संस्कृति, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस मेले ने शहर को एक बार फिर सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
मेले के संयोजक व परिधि के सचिव राहुल ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष के नव वर्ष मेले में परिधि, कला केंद्र, रंग ग्राम, जनप्रिय, एकता नाट्य मंच, इप्टा, अंजुमन बाग ओ बहार, आलय, समवेत, सफाली युवा क्लब, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, ताल नृत्य संस्थान, बिहार बंगाली समिति, मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र, शरण्या नृत्य कला केंद्र, वीणा पानी नृत्य संस्थान तथा डिवाइन गुरुकुलम स्कूल अमरपुर सहित कई संस्थाएं सहभागी बनी हैं।
परिधि के निदेशक एवं सांस्कृतिक समन्वय समिति के संयोजक उदय ने नव वर्ष मेले की भूमिका रखते हुए कहा कि इस मेले की शुरुआत वर्ष 1990 में हुई थी। उस समय कुछ ही संस्थाएं जुड़ी थीं, लेकिन समय के साथ यह मेला एक साझा सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि नव वर्ष सांस्कृतिक मेले की अवधारणा वरिष्ठ रंगकर्मी रामशरण की रही है, जिसका उद्देश्य भाषा, प्रकृति, संप्रदाय और विश्वास की विविधता में सद्भाव, वैज्ञानिक सोच, श्रम संस्कृति का सम्मान तथा उपभोक्तावाद के खिलाफ वैचारिक चेतना को मजबूत करना रहा है।
मेले में अनुपम आशीष और ऋतुराज द्वारा लगाए गए बहुजन साहित्य के स्टॉल ने विशेष ध्यान खींचा। स्टॉल पर डॉ. अंबेडकर, पेरियार, ललई सिंह, बिरसा मुंडा, संत गाडगे, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की जीवनी व विचारों से जुड़ी पुस्तकों को आगंतुकों ने खूब सराहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में अनन्या दास ने मनमोहक बांग्ला नृत्य प्रस्तुत किया। ताल नृत्य संस्थान की ओर से झुमर लोक नृत्य की प्रस्तुति प्रज्ञा प्रिया, ऋतु कुमारी, पूजा कुमारी, राधिका कुमारी, आराध्या कुमारी और माही सिंह ने दी।
एकता नाट्य मंच के राजेश कुमार झा द्वारा मिथिला के प्रसिद्ध कवि विद्यापति की दंतकथा पर आधारित संगीत नाटिका “उगना” की प्रस्तुति दर्शकों को भावविभोर कर गई। वहीं जनप्रिय संस्था की बच्चियों ने लोक नृत्य प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं।
डिवाइन गुरुकुलम स्कूल, अमरपुर (बांका) के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित “अरावली बचाओ” माइम, सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर नृत्य नाटिका तथा कठपुतली (पोपट) नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को संदेश के साथ मनोरंजन भी दिया। इसमें तेजस्व, अस्मिता, सत्यम, हर्ष, संध्या, निमिषा, शिवम्, अभिकांत, अमरजीत, शुभम श्री और अर्पित शामिल रहे।

चित्र प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कला केंद्र के छात्रों द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रदर्शनी में अभिजीत कुमार, अदिति गौरव, नीलांजना, कृषिका, रत्ना, डॉली, स्वाति कुमारी, दिव्यांशु ईशान, सौरभ कुमार पासवान और मृदुल सिंह के चित्रों ने दर्शकों को आकर्षित किया। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र द्वारा गांधी चित्र प्रदर्शनी तथा मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र, बरारी की ओर से मनोज कुमार पंडित और सुमना सागर के संयोजन में भागलपुर की लोक कला मंजूषा की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र, बरारी द्वारा आयोजित मंजूषा चित्र प्रतियोगिता में शिवम कुमार, पायल भारती, लक्ष्यराज, श्रेया रावत, देवांश कुमार, प्रिया जायसवाल, पिहू रानी, तमन्ना राठौर और पूनम कुमारी को पुरस्कार प्रदान किए गए।

कविता-मुशायरा गोष्ठी में गूंजे साहित्यिक स्वर
डॉ. प्रेमचंद पांडे के संचालन में आयोजित कविता-मुशायरा गोष्ठी में भानू झा, इकराम हुसैन ‘शाद’, डॉ. अलका सिंह, मृदुला सिंह, क़मर तबाँ, नवीन निकुंज, कपिल देव कृपाला, सच्चिदानंद किरण, अभय कुमार भारती, जावेद अख्तर और क़ाफ़िया कामिनी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
खेल व अन्य प्रतियोगिताएं
सफाली युवा क्लब द्वारा आयोजित दौड़ प्रतियोगिता में तेजस प्रताप, आनंद कुमार और सत्यम कुमार ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में अंशुमान राय, शुभम श्री और श्रेयांश कुमार विजेता रहे। बालिका वर्ग में निमिषा कुमारी, अदिति कुमारी और शांभवी तथा जूनियर वर्ग में सौम्या मिश्रा, काजल कुमारी और संध्या प्रभाकर ने शीर्ष स्थान हासिल किया। देशभक्ति गीत प्रतियोगिता में अरुण, काव्या, अनन्या श्री, रेदांश और सृष्टि सिंह को पुरस्कार दिए गए।

मेले में रामशरण, डॉ. योगेंद्र, डॉ. अलका, डॉ. फारूक अली, प्रकाश चंद्र गुप्ता, डॉ. डी.एन. चौधरी, डॉ. मनोज कुमार, संतोष कलाकार, तकी अहमद जावेद, डॉ. श्रीकांत प्रसाद, उज्ज्वल कुमार घोष, अनीता शर्मा, डॉ. चैतन्य प्रकाश, सुनील कुमार रंग, गौतम कुमार, मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में कला-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
नव वर्ष सांस्कृतिक मेला 2026 ने एक बार फिर यह साबित किया कि भागलपुर की सांस्कृतिक परंपरा आज भी जीवंत है और सामूहिक प्रयासों से कला, साहित्य व सामाजिक चेतना को नई दिशा दी जा सकती है।

































