बिहपुर सीएचसी में लापरवाही उजागर: घायल युवक को भाई ने गोद में उठाकर पहुंचाया एम्बुलेंस तक

लवकुश सिंह बंटी (बिहपुर), भागलपुर
मंगलवार की सुबह बिहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के केंद्र में आ गई। सुबह करीब 10 बजे हुई घटना ने अस्पताल की मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की सच्चाई को उजागर कर दिया, जब पैर टूटा होने के बावजूद एक घायल युवक को स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
बिहपुर जमालपुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 निवासी शैलेश दास का सोमवार की शाम हुए एक सड़क हादसे में पैर गंभीर रूप से टूट गया था। जानकारी के अनुसार, तेज रफ्तार में असंतुलित हुई थार वाहन ने बिहपुर पश्चिम रेलवे फाटक को तोड़ दिया, जिससे वहां मौजूद शैलेश बुरी तरह घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे इलाज के लिए बिहपुर सीएचसी पहुँचाया, जहां उसकी हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन स्ट्रेचर या व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुआ।
स्थिति इतनी गंभीर थी कि घायल शैलेश को एम्बुलेंस तक पहुँचाने के लिए उसके बड़े भाई रंजीत दास को उसे गोद में उठाकर पूरे अस्पताल परिसर से गुजरना पड़ा। यह दृश्य देख मौके पर मौजूद लोग विचलित हो उठे और अस्पताल प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
ग्रामीणों का कहना है कि बिहपुर सीएचसी में वर्षों से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की भारी कमी है। कई बार शिकायतों के बावजूद न तो उपकरण उपलब्ध कराए गए और न ही आवश्यक स्टाफ की तैनाती की गई। वार्ड बॉय एवं सहायक कर्मियों की कमी के कारण मरीजों को लगातार असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने शैलेश की स्थिति को गंभीर बताते हुए उसे मायागंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन जिस तरह उसे सीएचसी भवन से एम्बुलेंस तक ले जाया गया, उसने अस्पताल की तैयारी और जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों व परिजनों की मांग
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मामले में त्वरित संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या है। उन्होंने सीएचसी में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, वार्ड बॉय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की अपील की।
सीएचसी प्रभारी का पक्ष
इस संबंध में बिहपुर सीएचसी प्रभारी मुरारी पोद्दार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड बॉय और कंपाउंडर की गंभीर कमी है, जिसके लिए जिला चिकित्सा पदाधिकारी को पत्राचार किया जा चुका है।
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।