असम के रण में पप्पू यादव की ‘एंट्री’; हिमंता पर सीधा हमला और ‘घुसपैठ’ बनाम ‘भ्रष्टाचार’ की जंग

न्यूज स्कैन ब्यूरो, गुवाहाटी
बिहार के पूर्णिया से सांसद और कद्दावर नेता पप्पू यादव ने असम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ मोर्चा खोलकर पूर्वोत्तर की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। पप्पू यादव का यह हमला न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि यह भाजपा के सबसे मजबूत चुनावी हथियार ‘घुसपैठ’ की काट के रूप में ‘भ्रष्टाचार’ और ‘असमिया अस्मिता’ को खड़ा करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा जान पड़ता है।

‘भ्रष्टाचार’ बनाम ‘घुसपैठ’: नैरेटिव बदलने की कोशिश
असम में भाजपा और विशेषकर पीएम मोदी व अमित शाह का पूरा चुनाव प्रचार ‘घुसपैठ’ और ‘डेमोग्राफी’ के इर्द-गिर्द सिमटा रहता है। पप्पू यादव ने इसे सिरे से खारिज करते हुए सीधे मुख्यमंत्री पर ‘भ्रष्टतम’ होने का आरोप जड़ दिया।
पप्पू यादव का तर्क: घुसपैठ कोई मुद्दा नहीं है। असली मुद्दा मुख्यमंत्री द्वारा अपनी और अपनी पत्नी की संपत्ति बढ़ाने के लिए असम के हितों से समझौता करना है।
रणनीति: पप्पू ने हिमंता को ‘गद्दार’ और ‘धूर्त’ कहकर असमिया स्वाभिमान को झकझोरने की कोशिश की है, यह संदेश देते हुए कि असली खतरा बाहर से नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर बैठे लोगों से है।

  1. मोदी-शाह फैक्टर को चुनौती
    सांसद पप्पू यादव ने स्पष्ट कहा कि असम में इस बार मोदी-शाह का जादू नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि असम के मतदाता बिकाऊ नहीं हैं कि पैसे के बदले में वोट दे देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि असम के लोग बिकाऊ नहीं हैं और वे धोखेबाज़ों को माफ नहीं करते। यह बयान भाजपा के उस ‘अजेय’ दुर्ग पर प्रहार है जिसे मोदी लहर के भरोसे जीता जाता रहा है।
  2. कांग्रेस और गौरव गोगोई की बढ़ती ताकत
    पप्पू यादव का यह बयान कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन को असम में एक मनोवैज्ञानिक बढ़त देने की कोशिश है। उन्होंने गौरव गोगोई की स्थिति को ‘बेहतर’ बताकर यह संकेत दिया कि असम में विपक्ष अब बिखरा हुआ नहीं है।
    प्रचंड बहुमत का दावा: पप्पू यादव का मानना है कि इस बार असम का हिसाब ‘प्रचंड बहुमत’ के साथ विपक्ष के पक्ष में होगा।