पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 : ‘फॉर्म-6’ पर छिड़ा सियासी संग्राम; ममता का चुनाव आयोग को पत्र, अभिषेक बोले- ‘बाहरी’ मतदाताओं की एंट्री करा रही BJP

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच ‘फॉर्म-6’ (नया मतदाता पंजीकरण फॉर्म) को लेकर राज्य में भारी राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी पर ‘वोटर लिस्ट’ में हेराफेरी करने और बाहरी राज्यों से मतदाताओं को आयात करने का गंभीर आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, कोलकाता
TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा बिहार, यूपी, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों से करीब 800 लोगों के नाम बंगाल की मतदाता सूची में जोड़ने की कोशिश कर रही है। अभिषेक के अनुसार, मंगलवार को सीईओ (CEO) कार्यालय में करीब 800 बाहरी लोगों के फॉर्म-6 अवैध रूप से जमा करने की कोशिश की गई। अभिषेक ने ट्वीट किया, “ईवीएम से ज्यादा खतरा वोटर लिस्ट में बदलाव से है। भाजपा बंगाल में बाहरी लोगों को घुसाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करना चाहती है।”

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को पत्र: “सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तर्क दिया है कि, फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार केवल एडजुडिकेटिंग ऑफिसर (Adjudicating Officer) के पास है। मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) द्वारा सीधे आवेदन स्वीकार करना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और स्थापित चुनावी नियमों का उल्लंघन है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह एक पुराना पैटर्न है जिसे भाजपा ने पहले भी अन्य राज्यों में आजमाया है।

चुनाव आयोग (CEO) की सफाई: “नियमों के तहत हो रहा काम”
विवाद बढ़ता देख मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने सफाई दी है। उन्होंने TMC के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, साल भर कोई भी पात्र नागरिक फॉर्म-6 के जरिए मतदाता बनने के लिए आवेदन कर सकता है। प्रारंभिक जांच में नोपाड़ा जिले से प्राप्त 107 आवेदनों सहित अन्य सभी फॉर्म वैध पाए गए हैं और ये लोग राज्य के ही निवासी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो सीईओ और न ही डीईओ व्यक्तिगत रूप से नाम जोड़ सकते हैं, यह पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है।

सड़कों पर संग्राम: झड़प और पुलिसिया कार्रवाई
इस विवाद का असर सड़कों पर भी दिखा। कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय के बाहर तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। TMC ने इस मामले में हेयर स्ट्रीट थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।

भाजपा का पलटवार
वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘चुनावी हताशा’ करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे केवल वैध नागरिकों को उनके मताधिकार दिलाने में मदद कर रहे हैं और TMC हार के डर से संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछाल रही है।

जान लीजिए कि क्यों अहम है यह विवाद?
पश्चिम बंगाल में “बाहरी बनाम भीतरी” की राजनीति हमेशा से केंद्र में रही है। फॉर्म-6 के जरिए नए नाम जुड़ने पर रोक या कड़ी जांच की मांग कर ममता बनर्जी ने एक बार फिर बंगाली अस्मिता और स्थानीय वोट बैंक को सुरक्षित करने का कार्ड खेला है। अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है कि वह इस प्रक्रिया की पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करता है।