न्यूज स्कैन ब्यूरो, कटिहार
सरकार के अनुदानित मदरसों में कार्यरत नियोजित शिक्षक और कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मदरसा डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन, कटिहार के बैनर तले शुक्रवार को मदरसा शिक्षक और कर्मचारियों ने समाहरणालय गेट के समीप एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया । यह प्रदर्शन अपनी मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। उक्त संघ के जिलाध्यक्ष अब्दुल रतीब ने बताया कि मदरसा शिक्षक एवं कर्मचारियों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा 15 फरवरी 2011 और 17 सितंबर 2013 के संकल्पों के बावजूद उन्हें नियोजित शिक्षकों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त 2013 को हुई बैठक में मानदेय को 3000 रुपये से बढ़ाकर 15000 रुपये करने का प्रस्ताव था, जिसे लागू नहीं किया गया। इसी तरह, 22 फरवरी 2022 को पुनरीक्षित वेतनमान तय होने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया।उन्होने बताया कि हमारी मांग है कि मदरसा नियामावली 2022 में संशोधन करके अनुदानित मदरसों को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाए।नियोजित शिक्षकों और कर्मचारियों को विद्यालय एवं प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों के समान वेतन वृद्धि, चिकित्सा, आवास और अन्य भत्तों का लाभ मिले।
2459+1 मदरसों के साथ 1637 मदरसों के लिए भी अतिरिक्त स्वीकृति प्रदान की जाए।
मदरसा शिक्षकों की वेतन विसंगति को दूर कर उन्हें मूल वेतन और बराबर वेतन दिया जाए। 1128 कोटि के मदरसा शिक्षकों को एमपीडब्ल्यूएस पाठ्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के समान 6000-12000 रुपये का वेतन दिया जाए। संगठन के अध्यक्ष ने सरकार से अपील की है कि 17 सितंबर 2025 तक उनकी मांगों को पूरा किया जाए। अन्यथा वोलोग पटना के गरदनीबाग मे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगे। मौके पर सचिव जाफर रजा नईमी, कमरूल हौदा,फारूक नदरी,मो0अनवर सहित सैकड़ो की संख्या मे मदरसा शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे।

















