भाषा केवल संवाद का सेतु नहीं, यह तो आत्मा का स्वर और संस्कृति का अमिट प्रतीक है- राकेश पासवान शास्त्री

न्यूज स्कैन ब्यूरो। खगड़िया

जदयू के जिला प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने हिन्दी दिवस पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए हिन्दी भाषियों को शुभकामनाएं दिया है।श्री शास्त्री ने कहा कि आज के इस हिन्दी दिवस के पावन अवसर पर हम सबको यह स्मरण करना चाहिए कि हिन्दी मात्र एक बोली नहीं, अपितु यह भारत की आत्मा का अनुनाद, हमारी अस्मिता का अभिनव आलोक और सांस्कृतिक वैभव का शाश्वत गान है।हिन्दी ने न केवल विविधता को एक सूत्र में पिरोया है, बल्कि विश्व पटल पर भारतीय चिंतन की गौरवमयी गाथा को भी अंकित किया है। आइए, हम सब यह संकल्प लें कि हम हिन्दी की प्रतिष्ठा को और ऊँचाइयों पर ले जाएंगे। हम अपने व्यवहार, साहित्य, विज्ञान, राजनीति और सामाजिक संवाद में हिन्दी को उसका उचित गरिमामय स्थान देंगे।क्योंकि–”जहाँ हिन्दी का मान है, वहाँ भारत की पहचान है। जहाँ हिन्दी का सम्मान है, वहाँ संस्कृति का गगन है।”उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी धड़कन है, हमारी पहचान है, हमारी शिराओं में प्रवाहित वह सांस्कृतिक रसधारा है जो हमें अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य तक जोड़ती है।