कैमूर में वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण की शुरुआत, 5 दिसंबर तक अनिवार्य अपलोड

न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर

वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और केंद्रीकृत निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित उम्मीद पोर्टल (umeed.waqf.gov.in) पर देशभर की वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने 5 दिसंबर 2025 तक सभी संबंधित संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने का निर्देश दिया है।
इसी क्रम में बिहार स्टेट वक्फ बोर्ड, कैमूर इकाई ने भभुआ स्थित मुस्लिम मुसाफिर खाना में बैठक कर जिले में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण कार्य की औपचारिक शुरुआत की। कार्यक्रम में स्थानीय मुतवल्लियों और वक्फ प्रतिनिधियों को पोर्टल पर आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
वक्फ बोर्ड के सदस्य माशूक खान ने कहा कि विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने संशोधित वक्फ कानून लागू कर दिया है, और सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि कानून का पालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीद पोर्टल पर संपत्तियों का विवरण दर्ज कराना अब पूरी तरह अनिवार्य है। जिले में किसी को कोई असुविधा न हो, इसके लिए मुसाफिर खाना में विशेष तकनीकी टीम की तैनाती की गई है।
कैमूर इकाई के सचिव रमज़ान अंसारी ने बताया कि देशभर में मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान और मज़ार से जुड़ी वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे और विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बिहार भी इससे अछूता नहीं है। कुछ लोग बिना प्रमाण वक्फ संपत्तियों को घेरने या उनके उपयोग पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों को रोकने और सभी संपत्तियों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंजीकरण शिविर लगाया गया है।
सरकार के निर्देशों के अनुसार, जो मुतवल्ली या कॉर्डिनेटर समय पर संपत्तियों का विवरण अपलोड नहीं करेंगे, उन पर छह माह की सजा और 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण होने के बाद वक्फ संपत्तियों को स्थायी कानूनी सुरक्षा मिल जाएगी। पंजीकरण न कराने की स्थिति में संपत्ति का वक्फ दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा, जिसे बाद में केवल वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश पर ही पुनः बहाल किया जा सकेगा।
वक्फ बोर्ड ने जिला स्तर पर सभी मुतवल्लियों और संबंधित संस्थाओं से अपील की है कि अंतिम तिथि से पहले अपनी-अपनी संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन दर्ज कराकर संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।