पुलिस परिवारों के लिए बड़ा सामाजिक निवेश : पुलिस लाइन में स्कूल-हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा बेहतर होगी, आम लोगों को भी राहत

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार सरकार ने पुलिस कर्मियों और उनके आश्रितों के लिए एक समेकित सुविधा मॉडल तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों की पुलिस लाइनों में स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षकों और डॉक्टरों की नियुक्ति कर इन परिसरों को नियमित सेवा ढांचे से जोड़ा जाएगा।

नीति-निर्माताओं का तर्क है कि पुलिसकर्मियों की लगातार होने वाली ट्रांसफर-पोस्टिंग के कारण उनके परिवारों, खासकर बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के इलाज आदि पर सीधा असर पड़ता है। इस नई व्यवस्था से परिवारों को स्थानांतरण के बाद नए शहर में स्कूल एडमिशन या बेसिक मेडिकल सुविधा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

आम आदमी को क्या फायदा?

  1. सरकारी अस्पतालों पर भीड़ कम होगी
    पुलिस लाइनों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से बड़ी संख्या में मरीज वहीं उपचार ले सकेंगे। इससे जिला अस्पतालों और शहरी हेल्थ सेंटर्स पर मरीजों का दबाव घटेगा, जिसका सीधा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा: कम वेटिंग टाइम, तेज इलाज।
  2. स्कूलों में सीटों की उपलब्धता बढ़ेगी
    जब पुलिस परिवारों के बच्चे अपने परिसर में ही पढ़ेंगे, तो शहर के सरकारी स्कूलों में सीटों पर प्रतिस्पर्धा कम होगी। इससे स्थानीय बच्चों के लिए नामांकन की संभावनाएं बेहतर होंगी।
  3. इमरजेंसी हेल्थ रिस्पॉन्स बेहतर होगा
    पुलिस लाइन में मौजूद मेडिकल यूनिट्स आपात स्थितियों में आसपास के इलाकों के लिए भी प्रथम-स्तरीय सहायता केंद्र का काम कर सकती हैं, खासतौर पर सड़क दुर्घटना या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में।
  4. शहरी ट्रैफिक और सेवा-लोड में कमी
    स्कूल और अस्पताल की दैनिक आवाजाही कम होने से शहर के भीतर ट्रैफिक लोड घटेगा। साथ ही, नगर सेवाओं (जैसे OPD, एडमिशन काउंटर, डायग्नोस्टिक लैब) पर भीड़ कम होगी।
  5. पुलिस की कार्यक्षमता में अप्रत्यक्ष सुधार
    परिवार की शिक्षा-स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं कम होने से पुलिस बल अधिक फोकस के साथ ड्यूटी निभा सकेगा, जिसका असर कानून-व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ेगा और अंततः आम नागरिक को सुरक्षित माहौल मिलेगा।