कार्यकाल की होगी जांच तो करोड़ों की वित्तीय अनियमितता होगी उजागर !
-आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में जारी है ऑपरेशन आरोग्य
-डीएम के आदेश के बावजूद पांच महीने के ठंडे बस्ते में दबी रही कार्रवाई की फाइल
न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल
भ्रष्टाचार मुक्त जागरूकता अभियान संयोजक ,आरटीआई कार्यकर्ता सह जन सुराज नेता अनिल कुमार सिंह के ऑपरेशन आरोग्य की दूसरी किश्त जारी होने के बाद पांच महीने से ठंडे बस्ते में दबे मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। सिविल सर्जन के आवेदन पर फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले तत्कालीन डीपीएम मो. मिनतुल्लाह पर सदर थाने में धोखाधड़ी का कांड संख्या 624/25 दर्ज किया गया है। सदर थाना को दिए आवेदन में सीएस डॉ. ललन ठाकुर ने कहा है कि दरभंगा के अलीनगर थाना अंतर्गत बैनीपुर धमसेन निवासी मो. अंसारी के पुत्र मो. मिनतुल्लाह फर्जी डिग्री पर जिले में 16 फरवरी 2019 से 6 फरवरी 2022 तक प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र सरायगढ़ में प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक के पद पर और 7 फरवरी 2022 से 2 अगस्त 2025 तक जिला स्वास्थ्य समिति में डीपीएम के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने तत्कालीन फर्जी डीपीएम पर धोखाधड़ी करने से संबंधित सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर न्यायिक कार्रवाई करने को कहा है। आवेदन के आधार पर फर्जी डीपीएम के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। उधर, फर्जी फिग्रीधारी डीपीएम पर केस के बाद अब उसी विश्वविद्यालय की डिग्री पर अस्पताल प्रबंधक बनी उनकी पत्नी की जांच पर सबकी नजर टिकी हुई ह
फर्जी डिग्री पर नौकरी करने के मामले में तत्कालीन डीपीएम पर कार्रवाई तो शुरू हो गई लेकिन उसी डिग्री पर निर्मली अस्पताल प्रबंधक बनी उनकी पत्नी निखत जहाँ परवीन अब भी कार्रवाई के घेरे से बाहर सुरक्षित है।डीपीएम मो. मिनतुल्लाह ने अपनी पत्नी को भी फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी दिलवा दी।डीएम सावन कुमार के आने के बाद फर्जी डीपीएम की पोल खुलते ही पत्नी ने भी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।
वर्ष 2009 में स्थापित यूनिवर्सिटी को सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने किया फर्जी घोषित
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डीपीएम मो. मिन्नतुल्लाह और उनकी पत्नी ने
मेघालय के चंद्र मोहन झा (सीएमजे) यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री प्राप्त था।विभाग में जमा सर्टिफिकेट के अनुसार डीपीएम मो. मिन्नतुल्लाह शैक्षणिक सत्र 2011-13 में पढ़ाई की और 2013 में एमबीए का सर्टिफिकेट प्राप्त किया। चंद्र मोहन झा (सीएमजे) यूनिवर्सिटी की स्थापना 20 जुलाई 2009 को निजी विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी लेकिन मेघालय सरकार ने यूनिवर्सिटी को बंद करते हुए यूनिवर्सिटी के संचालन अवधि के दौरान 2010 से 2013 तक जारी सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र को अवैध घोषित कर दिया था। निजी विश्वविद्यालय ने सरकार के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गया लेकिन वहां भी मामला खारिज हो गया। इसके बाद यूजीसी ने भी चंद्र मोहन झा (सीएमजे) यूनिवर्सिटी को फर्जी घोषित किया और इसी फर्जी डिग्री के सहारे मो.मिन्नतुल्लाह और उनकी पत्नी निखत जहाँ परवीन लंबे समय से नौकरी करते रहे।
































