कैमूर पहाड़ी वन सेंचुरी की जमीन बेचने का मामला उजागर: 62.5 डिसमिल वन भूमि की अवैध रजिस्ट्री व दाखिल-खारिज, डीएम से कार्रवाई की अनुशंसा

न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर

कैमूर पहाड़ी स्थित वन सेंचुरी की जमीन को फर्जी तरीके से बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। बिना समुचित जांच के वन विभाग की 62.5 डिसमिल जमीन की न सिर्फ रजिस्ट्री कर दी गई, बल्कि उसका दाखिल-खारिज भी करा दिया गया। इस प्रकरण में जिला अवर निबंधन पदाधिकारी और भगवानपुर अंचल अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। वन विभाग ने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिलने पर जिलाधिकारी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
मामला भगवानपुर थाना क्षेत्र के मौजा चुआ गांव का है। जानकारी के अनुसार भभुआ थाना क्षेत्र के अखलासपुर निवासी स्वर्गीय लोचन पाल के पुत्र शिवनाथ पाल, श्रीराम दाहिन पाल और श्रीराम भजन पाल ने वर्ष 2022 में वन विभाग की जमीन को निजी बताकर बेच दिया। उक्त भूमि की रजिस्ट्री विक्रय पत्र संख्या 61/2022 के तहत भगवानपुर थाना क्षेत्र के उमापुर गांव निवासी अखिलेश्वर सिंह के पुत्र सतीश कुमार एवं गुप्तेश्वर सिंह के पुत्र सुनील कुमार सिंह के नाम कर दी गई। बाद में बिना आपत्ति के दाखिल-खारिज भी हो गया।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता धीरेंद्र पाल ने चार माह पूर्व वन विभाग को लिखित शिकायत दी। शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, तब वन विभाग सक्रिय हुआ। जांच में शिकायत सही पाई गई और यह स्पष्ट हुआ कि बेची गई जमीन वन सेंचुरी की है।
कैमूर के डीएफओ संजीव रंजन ने बताया कि जांच में वर्ष 2022 में 62.5 डिसमिल वन भूमि की अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला अवर निबंधन पदाधिकारी और भगवानपुर सीओ से पत्र के माध्यम से जवाब मांगा गया था कि वन विभाग की जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कैसे किया गया, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला है। ऐसे में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की जमीन से जुड़े सभी लोगों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वन संपदा से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन कब और कैसे दोषियों पर कार्रवाई करता है।