नरक निवारण चतुर्दशी पर शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत को करने से नरक से मिलती है मुक्ति, भगवान शिव की भक्तों पर होती है विशेष कृपा

बाबा तिल्हेश्वर, कपिलेश्वर, भीमशंकर महादेव मंदिर सहित जिले के मंदिरों में सुबह से पूजा करने के लिए कतार में लगे रहे श्रद्धालु

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

नरक निवारण चतुर्दशी पर शिवालयों में शनिवार को श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ रही। जिले में मंदिरों के आसपास सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या भी देखी गई। स्थानीय लोग और पुलिस प्रशासन को दिनभर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। सदर प्रखंड के सुखपुर में स्थित बाबा तिल्हेश्वर महादेव मंदिर और बरुआरी के कपिलेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही। राघोपुर प्रखंड के धरहरा भीमशंकर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखी गई। किशनपुर प्रखंड के मलाढ़ के जागेश्वर नाथ महादेव मंदिर, भीमशंकर मंदिर, कपिलेश्वर महादेव मंदिर, स्टेशन चौक, रेलवे मालगोदाम मंदिर, चकला निर्मली शिव मंदिर, प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ रही। लोग ठंड के बावजूद सुबह से ही शिवलिंग पर जल चढ़ाने व पूजा अर्चना के लिए शिवालय पहुंचने लगे। शाम तक शिवालयों में पूजा के लिए भक्तों की कतार लगी रही है। कई जगह शिवालय परिसर में मेला लगी है। कीर्तन-भजन और शिवभजन की गूंज से माहौल भक्तिमय बना रहा। मंदिर प्रशासन और पुलिस जवान ने श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नरक निवारण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव का व्रत व ध्यान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। भक्तों को हर गलतियों से क्षमा मिलती है। भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है।

नरक से छुटकारा दिलाने का व्रत है नरक निवारण चतुर्दशी :

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माघ मास के कृष्ण पक्ष की 14वीं तिथि यानी चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो कोई भी इस व्रत को विधि-विधान से रखता है, उसे मृत्यु के बार नरक नहीं जाना पड़ता है। इस व्रत के प्रभाव से भक्तों को नरक से छुटकारा मिल जाता है। इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करने पर मनवांछित फल मिलता है। धर्म-शास्त्रों के मुताबिक नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत रखने से जाने-अनजाने में की गई हर छोटी-बड़ी गलतियों को भगवान शिव माफ कर देते हैं। भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का है विशेष महत्व :नरक निवारण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। विधि-विधान से नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत करने पर भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत में सुबह से लेकर सूर्यास्त तक व्रत रखा जाता है। व्रत के दौरान फलाहार किया जा सकता है। हालांकि, अधिकांश लोग इस व्रत को बिना अन्न-फल ग्रहण किए करते हैं। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक व्रत रखने के बाद इसका पारण किया जाता है। इस व्रत का पारण शाम के समय बेर और शकरकंद फल से किया जाता है। नरक निवारण चतुर्दशी व्रत में बेर और शकरकंद से पारण करना शुभ माना गया है।