न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के वित्त मंत्री द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के आंकड़े राज्य की बदलती अर्थव्यवस्था का दस्तावेजी प्रमाण हैं। जहाँ एक ओर बिहार 13.1% की विकास दर के साथ बड़े राज्यों में तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर है, वहीं गहराई से देखने पर कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो सीधे आपकी जेब और भविष्य से जुड़े हैं।
- आय में वृद्धि: कागजी आंकड़ा या आपकी हकीकत?
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
वर्तमान दर: 2024-25 में यह 76,490 रुपये है, जो 2020-21 के 46,412 रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।
क्षेत्रवार विषमता: रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि आय में क्षेत्रीय विषमता है। इसे पाटने के लिए सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई है, जिसका लक्ष्य अगले 5 वर्षों में नागरिकों की आय दोगुनी करना है।
- सकल पूंजी निर्माण (GFCF) में गिरावट: एक चिंताजनक संकेत
एक महत्वपूर्ण तथ्य जो आम तौर पर नजरअंदाज हो जाता है, वह है सकल पूंजी निर्माण की गति का धीमा होना।
2022-23 में इसमें 12.8% की वृद्धि थी, जो 2024-25 में गिरकर 8.6% (स्थिर मूल्य पर) रह गई है।
प्रभाव: इसका सीधा मतलब है कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, पुल, अस्पताल) और लंबी अवधि की संपत्तियों में निवेश की रफ्तार पहले की तुलना में कम हुई है। यह भविष्य में औद्योगिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
- सेक्टर-वार बदलाव: कहाँ मिल रहा है काम?
प्राइमरी सेक्टर (कृषि): अर्थव्यवस्था में इसका योगदान 22% से घटकर 18% रह गया है। यह संकेत है कि लोग खेती से निकलकर अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं।
सेकेंडरी सेक्टर (उद्योग व निर्माण): यहाँ भारी बढ़त है। इसका योगदान 21% से बढ़कर 27% हो गया है। बिजली, गैस और जल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में 21% से अधिक की वृद्धि हुई है।
टर्शियरी सेक्टर (सेवा): सेवा क्षेत्र अभी भी 54.8% के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है।
- निवेश और रोजगार की नई तस्वीर
एमएसएमई (MSME): राज्य में 4,64,453 से बढ़कर 7,74,567 आवेदन उद्योग के लिए आए हैं।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना: इस योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए बड़े पैमाने पर मदद मिल रही है, जिससे बिहार अब केवल ‘लेबर सप्लायर’ राज्य न रहकर ‘उद्यमी’ राज्य बनने की ओर अग्रसर है।
- राजकोषीय स्थिति: क्या सरकार कर्ज में है?
राजस्व प्राप्ति में सुधार हुआ है। राज्य की अपनी कुल राजस्व प्राप्ति ₹1.28 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.18 लाख करोड़ हो गई है। राजस्व घाटे को नियंत्रित करना सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है, जिससे सरकारी योजनाओं (जैसे सात निश्चय) के लिए फंड की कमी नहीं होगी।
बिहार की अर्थव्यवस्था ‘सर्वाइवल’ मोड से निकलकर ‘एस्पिरेशनल’ (महत्वाकांक्षी) मोड में आ गई है। अगर आप छात्र हैं, तो डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मौके बढ़ रहे हैं। अगर आप उद्यमी हैं, तो राज्य का बढ़ता राजस्व और निवेश के प्रस्ताव आपके लिए अच्छा माहौल बना रहे हैं। हालाँकि, प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत (जो बिहार से करीब 2.5 गुना अधिक है) तक ले जाना अभी भी एक लंबी चुनौती है।
































