फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को बैठक: 2030 तक फाइलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
भागलपुर में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से समीक्षा भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने की। इसमें 10 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई।
बैठक में सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को पीपीटी के माध्यम से बताया गया कि वर्ष 2030 तक फाइलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी लक्ष्य के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा प्रतिवर्ष बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
अधिकारियों को बताया गया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, जिसे आमतौर पर हाथी पांव के नाम से जाना जाता है। यह रोग संक्रमण के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। इसलिए इस बीमारी के पूर्ण उन्मूलन के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति द्वारा एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) दवा का सेवन अनिवार्य है।
अभियान के तहत डाइथाइलकार्बामेजिन (DEC) एवं एल्बेंडाजोल की गोलियां केवल एक बार, भोजन के बाद दी जाएंगी। यह दवा दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को छोड़कर सभी के लिए सुरक्षित है।
दवा की खुराक इस प्रकार निर्धारित की गई है—
2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को DEC की एक गोली एवं एल्बेंडाजोल की एक गोली,
6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को DEC की दो गोलियां एवं एल्बेंडाजोल की एक गोली,
जबकि 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को DEC की तीन गोलियां एवं एल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी।
अभियान के दौरान 11 फरवरी 2026 को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जीविका दीदी एवं आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ी महिलाओं को दवा खिलाई जाएगी। इसके बाद शेष दिनों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर एमडीए दवा का वितरण करेंगी। यह दवा पूरी तरह निःशुल्क दी जाएगी।
आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, एएनएम एवं जीएनएम अपने समक्ष लोगों को दवा खिलाएंगी। इसके लिए पांच स्तरों पर टीमों का गठन किया गया है।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि यह अभियान पूर्व वर्षों में भी सफलतापूर्वक चलाया गया है और दवा का कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक संक्रामक रोग है, जिसे समाज से खत्म करने के लिए समाज के सभी लोगों की भागीदारी जरूरी है। यह केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जीविका दीदी, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं शिक्षक मिलकर इस अभियान को सफल बनाएं। साथ ही पहले से ही लोगों को यह जानकारी दी जाए कि दवा भोजन के बाद ही लेनी है, ताकि अभियान के दौरान कोई असुविधा न हो।
उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद कुछ लोगों को हल्का प्रतिकूल प्रभाव महसूस हो सकता है, जिससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के कीड़े दवा से नष्ट हो रहे हैं।
जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों में बच्चों को दवा खिलाने के निर्देश दिए और जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को जिला शिक्षा पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम तय करने को कहा।
बैठक में संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा, डीपीओ आईसीडीएस अनुपमा कुमारी, डीपीओ एमडीएम बबीता कुमारी सहित पिरामिड के सदस्यगण उपस्थित थे।