न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली जंग अब केवल संख्या बल का खेल नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर रसूख और गठबंधन की मजबूती का लिटमस टेस्ट बन गई है। इस पूरी बिसात पर सबसे ज्यादा नजरें लोजपा (रामविलास) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर टिकी हैं। चर्चा है कि चिराग अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने के लिए बिसात बिछा रहे हैं, जो उनकी दिवंगत पिता रामविलास पासवान की विरासत को उच्च सदन में मजबूती देगी।
चिराग का ‘शक्ति प्रदर्शन’ और एनडीए का गणित
बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, एक राज्यसभा सीट के लिए 41 वोटों की दरकार है। चिराग के पास 19 विधायक हैं, जो अकेले दम पर जीत के लिए काफी नहीं हैं। हालांकि, भाजपा (89) और जदयू (85) की अतिरिक्त वोटों (करीब 38 वोट) पर चिराग की नजर है।
राजनीतिक दांव : यदि एनडीए नेतृत्व चिराग की मांग मानता है, तो उन्हें महज 3 और वोटों की जरूरत होगी। यह चिराग के लिए निर्दलीयों या अन्य छोटे दलों के साथ अपने संबंधों को भुनाने का बड़ा अवसर होगा। यहीं पर चिराग के राजनीतिक और रणनीतिक कौशल की भी परीक्षा होगी।
कद का इम्तिहान: यह चुनाव तय करेगा कि एनडीए में चिराग का कद अब उस स्तर पर पहुंच गया है जहां वे अपने सहयोगियों से ‘अतिरिक्त बोनस’ सीट हासिल कर सकें।
राजद का सूपड़ा साफ? आर-पार की लड़ाई
विपक्षी खेमे, विशेषकर राजद के लिए 2026 की यह राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है। एनडीए के एकजुट होने से राजद के प्रेमचंद्र गुप्ता और एडी सिंह जैसे दिग्गजों की सीटें खतरे में हैं। अगर एनडीए पांचवीं सीट पर चिराग के उम्मीदवार या किसी साझा प्रत्याशी को उतारता है, तो राजद का उच्च सदन से पत्ता कटना लगभग तय माना जा रहा है।
नितिन नबीन और पवन सिंह: बीजेपी के उभरते चेहरे
खबरों के बाजार में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का नाम भी सबसे ऊपर है। मंत्री पद से इस्तीफे के बाद उनका दिल्ली जाना तय माना जा रहा है। वहीं, भोजपुरी स्टार पवन सिंह को लेकर भी अटकलें हैं कि विधानसभा चुनाव में उनके ‘कैंपेन’ का इनाम उन्हें राज्यसभा के जरिए मिल सकता है।
जदयू और कुशवाहा की चुनौती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पुरानी परंपरा रही है कि वे दो कार्यकाल के बाद चेहरा बदलते हैं। ऐसे में हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर को दोबारा मौका मिलेगा या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है। दूसरी ओर, उपेंद्र कुशवाहा के लिए केवल 4 विधायकों के साथ अपनी दावेदारी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।


























