सीमांचल में ‘डिजिटल कवच’ और ‘बेटी-रोटी’ का सम्मान… अमित शाह के दौरे के बाद बदल रही सीमा की सूरत

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया/किशनगंज
भारत-नेपाल की लगभग 729 किलोमीटर लंबी खुली सीमा अब केवल मानवीय भरोसे पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की अत्याधुनिक तकनीक की निगरानी में होगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया सीमांचल दौरे के बाद गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा और सीमाई इलाकों के सामाजिक ताने-बाने को लेकर एक ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य घुसपैठ रोकना और सीमावर्ती गांवों के निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ना है।

अंतरिक्ष से पिलरों की पहरेदारी: GNSS तकनीक का उपयोग
भारत-नेपाल सीमा पर अक्सर पिलरों के गायब होने या उन्हें खिसकाने की खबरें आती रही हैं, जिससे विवाद की स्थिति बनती थी।
अब इसका समाधान ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) के जरिए निकाला गया है।
सीमा के सभी पिलरों का सटीक अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) सैटेलाइट के जरिए लॉक किया जाएगा।
सशस्त्र सीमा बल (SSB) के इनपुट के आधार पर सीमा से गायब हुए 1253 पिलरों को दोबारा स्थापित किया जा रहा है।
सैटेलाइट मैपिंग के बाद यदि कोई पिलर अपनी जगह से हटाया जाता है, तो कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
यह ‘नो मेन्स लैंड’ की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल दीवार की तरह काम करेगा।

‘बेटी-रोटी’ का रिश्ता: दुल्हनों को मिलेगी कानूनी पहचान
भारत और नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे वैवाहिक संबंधों को अब कानूनी सुगमता और सुरक्षा का कवच दिया जा रहा है।
सीमांचल के इलाकों (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज) में हजारों ऐसी महिलाएं हैं जो नेपाल से ब्याह कर भारत आई हैं, लेकिन नागरिकता के दस्तावेजों के अभाव में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर प्रशासन जल्द ही एक व्यापक सर्वे शुरू करेगा। ऐसी ‘नेपाली दुल्हनों’ की पहचान कर उन्हें अस्थाई पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।
यह पहल न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि उन महिलाओं को भारतीय नागरिकता दिलाने की प्रक्रिया में प्रशासनिक सहायता भी प्रदान करेगी।
इससे उन्हें सरकारी योजनाओं और मतदान का अधिकार मिलने में आसानी होगी।

सुरक्षा का त्रि-स्तरीय ढांचा: तकनीक, सतर्कता और समन्वय
अमित शाह की हाई-लेवल मीटिंग में सीमा सुरक्षा को तीन स्तरों पर मजबूत करने का निर्णय लिया गया है:
मिसिंग पिलरों की बहाली और गश्त को तेज करना।
ड्रोन और सैटेलाइट के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
सीमावर्ती थानों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल ताकि घुसपैठ और तस्करी (खासकर जाली नोट और नशीले पदार्थ) पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू हो सके।

सुरक्षा और संवेदनशीलता का संतुलन
सरकार की यह कवायद केवल सीमाओं को सील करने की नहीं, बल्कि उन्हें ‘व्यवस्थित’ करने की है। जहाँ एक ओर सैटेलाइट पिलरों के जरिए घुसपैठियों और तस्करों के लिए रास्ते बंद किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेपाल से आई बहुओं को पहचान देकर सरकार ने सीमाई समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई है। यह कदम सीमांचल जैसे संवेदनशील इलाके में ‘डेमोग्राफिक बदलाव’ (जनसांख्यिकीय परिवर्तन) पर नजर रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।