बिहार की सियासत में ‘इन्वेस्टमेंट’ का नया मिजाज : चिराग पर कॉरपोरेट मेहरबान, नीतीश की पार्टी फंड में 932% का उछाल

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना/नई दिल्ली
राजनीति में सत्ता की आहट और सांगठनिक मजबूती का सबसे बड़ा पैमाना अब ‘पार्टी फंड’ बनने लगा है। बिहार के सियासी गलियारों से जो ताजा आंकड़े निकलकर आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू की फंडिंग में जहां रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) कॉरपोरेट जगत की नई ‘ब्लू चिप’ पार्टी बनकर उभरी है।

नीतीश का ‘बाउंस बैक’: 1.81 करोड़ से सीधे 18.69 करोड़ तक का सफर
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में महज 43 सीटों पर सिमटने वाली जेडीयू को लेकर कभी कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी का जनाधार खिसक रहा है। यही वजह थी कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में पार्टी को महज 1.81 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में 12 सीटें जीतकर नीतीश कुमार ने अपनी ‘विश्वसनीयता’ (Credibility) का लोहा मनवा लिया। नतीजा यह हुआ कि 2024-25 में पार्टी चंदे में 932 प्रतिशत का उछाल आया और यह आंकड़ा 18.69 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। प्रूडेंट और प्रोग्रेसिव जैसे इलेक्टोरल ट्रस्टों ने जेडीयू पर जमकर भरोसा जताया है।

चिराग पासवान: कॉरपोरेट जगत के ‘पावर प्लेयर’
सबसे दिलचस्प कहानी चिराग पासवान की है। जिस पार्टी (लोजपा) को 2004 से 2015 के बीच यानी 10 सालों में कुल 7 करोड़ रुपये मिले थे, उसी पार्टी ने चिराग के नेतृत्व में महज एक साल (2024-25) में 11 करोड़ रुपये का चंदा जुटा लिया है। 2024 लोकसभा चुनाव में 100% स्ट्राइक रेट और 2025 विधानसभा चुनाव में राजद के किलों को ध्वस्त कर 19 सीटें जीतने के बाद चिराग अब कॉरपोरेट घरानों की पहली पसंद बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी केमिस्ट्री और युवाओं में उनकी पैठ ने उन्हें ‘फ्यूचर लीडर’ के तौर पर स्थापित कर दिया है।

क्या हैं इसके सियासी मायने?
कॉरपोरेट जगत का यह ‘पॉलिटिकल निवेश’ साफ संकेत दे रहा है कि बाजार उन्हीं पर दांव लगाता है जिनमें ‘डिलीवरी’ की क्षमता होती है। जहां नीतीश कुमार अपनी प्रशासनिक निरंतरता के लिए चंदा बटोर रहे हैं, वहीं चिराग पासवान अपने बढ़ते जनाधार और सांगठनिक विस्तार के दम पर तिजोरी भर रहे हैं। बिहार की राजनीति अब केवल रैलियों से नहीं, बल्कि मजबूत ‘बैंक बैलेंस’ और ‘कॉरपोरेट ट्रस्ट’ के सहारे नए समीकरण गढ़ रही है।