बिहार का औद्योगिक उदय : समझिए क्या ₹30,000 करोड़ का अदाणी प्रोजेक्ट बनेगा राज्य की तरक्की का ‘पावर हाउस’?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
दशकों से बिहार की पहचान ‘मजदूरों की खान’ के रूप में रही है, जहाँ से हर साल लाखों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। लेकिन भागलपुर के पीरपैंती में अदाणी समूह द्वारा किया जा रहा ₹30,000 करोड़ का निवेश इस तस्वीर को बदलने की कूवत रखता है । यह न केवल बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा निजी निवेश है, बल्कि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक भविष्य के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ भी माना जा रहा है ।

बिहार की आर्थिक प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा बिजली की कमी रही है। वर्तमान में राज्य की प्रति व्यक्ति बिजली खपत (317 kWh) राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, जबकि 2035 तक राज्य की मांग 18,000 मेगावाट से अधिक होने का अनुमान है। पीरपैंती में लग रहा 2,400 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट राज्य की भविष्य की बिजली जरूरतों का लगभग 25% हिस्सा अकेले पूरा करेगा। अदाणी पावर ने ₹6.075 प्रति यूनिट के टैरिफ पर यह टेंडर जीता है, जो मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है। इससे उद्योगों को सस्ती और निरंतर बिजली मिलेगी, जो नए निवेश को आकर्षित करने के लिए अनिवार्य है ।

इस प्रोजेक्ट का सबसे सीधा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में प्रत्येक ₹1 करोड़ का निवेश लगभग 200-250 मानव-वर्ष का रोजगार पैदा करता है ।
उम्मीद की जाती है कि पांच वर्षों की अवधि में इससे हजारों रोजगार की संभावना बनेगी। लॉजिस्टिक्स, खान-पान और सेवा क्षेत्र में भी निश्चित तौर पर उछाल आएगा।
यह निवेश उन 3.4 करोड़ बिहारी श्रमिकों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो वर्तमान में राज्य के बाहर काम कर रहे हैं ।

पीरपैंती प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसकी रणनीतिक स्थिति (गंगा नदी, नेशनल हाईवे और रेलवे कनेक्टिविटी) भागलपुर और आसपास के जिलों के लिए एक ‘इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ का काम करेगी।
निरंतर बिजली की आपूर्ति से भागलपुर के पावरलूम और सिल्क उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे लागत कम होगी और गुणवत्ता बढ़ेगी ।
पूर्णिया और सीमांचल के मखाना उत्पादकों के लिए कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाना अब आसान होगा ।
पीरपैंती रेलवे स्टेशन और गंगा नदी के पास होने के कारण यह इलाका पूर्वी भारत का एक बड़ा माल ढुलाई केंद्र (Logistics Hub) बन सकता है ।

इस प्रोजेक्ट को केंद्र और राज्य सरकार की अन्य बड़ी योजनाओं के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।
पास ही पूर्णिया में नए सिविल एन्क्लेव के निर्माण से इस औद्योगिक क्षेत्र को वैश्विक कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे बड़े निवेशकों और विशेषज्ञों का आना-जाना सुगम होगा ।
अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन और गंगा पर बन रहे पुल इस पूरे इलाके को आर्थिक रूप से एकजुट करेंगे ।

जहाँ एक तरफ निवेश की वाहवाही हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ गंभीर चुनौतियां भी खड़ी हैं:
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दायर याचिका (श्रवण सिंह बनाम अदाणी पावर) और पर्यावरणविदों की चिंताएं पेड़ों की कटाई और गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 10,055 पेड़ प्रभावित होंगे, जिसके लिए कंपनी ने 100 एकड़ में हरित पट्टी विकसित करने का वादा किया है ।
919 भूस्वामियों से ली गई भूमि को लेकर मुआवजे और उसे ‘बंजर’ घोषित करने की प्रक्रियाओं पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं ।

अदाणी फाउंडेशन अपने ‘सक्षम’ (SAKSHAM) और ‘कर्म शिक्षा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने की योजना बना रहा है, ताकि वे संयंत्र में सीधे काम कर सकें। झारखंड के गोड्डा प्रोजेक्ट की तरह, यहाँ भी सीएसआर के माध्यम से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद है ।

पीरपैंती प्रोजेक्ट बिहार के लिए केवल बिजली का संयंत्र नहीं, बल्कि एक ‘औद्योगिक पुनर्जागरण’ का प्रतीक है । यदि यह समयबद्ध तरीके से और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए पूरा होता है, तो यह बिहार को पिछड़ेपन के टैग से मुक्त कर भारत के नए आर्थिक विकास इंजन के रूप में स्थापित कर सकता है।