द्वितीय फेज में होने वाले चुनाव को लेकर प्रचार प्रसार का दौर आज शाम थमा

सुपौल के सभी पांच विधानसभा क्षेत्र से कुल 48 उम्मीदवार है मैदान में, दो मंत्री भी है शामिल

विनय कुमार मिश्र, सुपौल

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर द्वितीय चरण में 11 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए रविवार की शाम चुनाव प्रचार का शोर थम गया है। प्रत्याशियों व समर्थकों द्वारा मतदाताओं को समझाने, बुझाने व अपने पक्ष में मतदान करने हेतु रिझाने की पुरजोर कोशिश जारी है। अपनी जीत को सुनिश्चित करने हेतु अधिकांश उम्मीदवारों द्वारा जात पात, जमात व अन्य हथकंडों का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन सब के बीच अधिकतर मतदाताओं की अंतिम समय तक चुप्पी उम्मीदवारों के साथ ही चुनावी पंडितों के भी पसीने छुड़ा रही है।

48 उम्मीदवार हैं मैदान में
गौरतलब है कि सुपौल जिले में कुल पांच सीटें हैं। जिनमें निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज एवं छातापुर विधानसभा सीट शामिल हैं। कुल प्रत्याशियों की संख्या 48 है। जिनमें निर्मली में 8, पिपरा में 13, सुपौल में 9, त्रिवेणीगंज में 5 एवं छातापुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 13 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

दो मंत्री भी हैं मैदान में
मालूम हो कि सुपौल जिले की पांच सीटों पर पहले से एनडीए का कब्जा है। इनमें चार सीटों सुपौल, पिपरा, निर्मली एवं त्रिवेणीगंज में जदयू तथा छातापुर से भाजपा के सीटींग विधायक हैं। इनमें सुपौल से मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव एवं छातापुर से मंत्री नीरज कुमार सिंह जैसे बड़े चेहरे हैं। जिनके चुनाव पर विशेष रूप से लोगों की निगाहें टिकी होती हैं।

अधिकांश सीटों पर सीधा मुकाबला
जानकारों के मुताबिक सुपौल जिले के तकरीबन सभी सीटों पर महागठबंधन एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि नवगठित जनसुराज पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जो नतीजे को प्रभावित कर सकती है। वहीं बागी व निर्दलीय उम्मीदवार भी कई प्रमुख पार्टियों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।

वोटरों की चुप्पी से परेशान प्रत्याशी
इस चुनाव में सबसे बड़ी जो बात दिख रही है, वो यह कि पार्टी प्रत्याशी, कार्यकर्ता व कुछ कट्टर समर्थकों को अगर दरकिनार कर दें तो आम मतदाताओं में चुनावी जोश नहीं दिख रहा। यह अलग बात है कि जब उम्मीदवार इन वोटरों से आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं तो होशियार हो चुके वोटर ‘ तुम्हारी भी जय जय और हमारी भी जय जय ‘ की तर्ज पर उनके साथ खूब सकारात्मक व्यवहार करती है। लेकिन सही मायने अपने पत्ते नहीं खोलती है और यही उम्मीदवारों व राजनीति के तथाकथित दिग्गजों की परेशानी का सबब बना हुआ है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन उम्मीदवारों व समर्थकों ने रोड शो भी किया।