आजादी के 75 साल बाद देश जब एक ‘जाति-विहीन’ और समतामूलक समाज की ओर बढ़ने का सपना देख रहा है, तब यूजीसी (UGC) के जरिए एक ऐसा नियम थोपने की कोशिश की गई जो न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि समाज को दो फाड़ करने वाला है। UGC रेगुलेशन 2026 के रूप में सरकार ने जो ‘सियासी दांव’ चला, उस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की रोक और सख्त टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए शिक्षा के मंदिरों को भी राजनीति का अखाड़ा बनाने से बाज नहीं आ रहे।
एकपक्षीय कानून और ‘वोटबैंक’ का गणित – स्पष्ट दिख रहा है कि सरकार का यह कदम शुद्ध रूप से ओबीसी (OBC) वोटबैंक को साधने की एक हताश कोशिश है। किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग के छात्रों को सुरक्षा के दायरे से बाहर कर देना किस तरह का न्याय है? यूजीसी के नए नियमों में ‘भेदभाव’ की परिभाषा को जिस तरह से मरोड़ा गया, वह सीधे तौर पर सवर्ण और सामान्य वर्ग के छात्रों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की साजिश जैसा प्रतीत होता है। क्या भेदभाव केवल जाति विशेष के आधार पर ही होता है? क्या सामान्य वर्ग का छात्र मानसिक या प्रशासनिक उत्पीड़न का शिकार नहीं हो सकता?
सुप्रीम कोर्ट का आईना और सरकार की नीयत – माननीय उच्चतम न्यायालय ने जो सवाल पूछे हैं, वे सीधे सरकार की नीयत पर प्रहार करते हैं। कोर्ट का यह पूछना कि “क्या हम 75 साल बाद पीछे की ओर जा रहे हैं?” यह बताने के लिए काफी है कि यूजीसी का यह नियम ‘सामाजिक न्याय’ के नाम पर ‘सामाजिक अन्याय’ का दस्तावेज था। नियमों की भाषा इतनी अस्पष्ट और खतरनाक थी कि इसका उपयोग किसी को भी फंसाने या टारगेट करने के लिए किया जा सकता था।
राजनीति के दुष्चक्र में छात्र – शिक्षा का मकसद जोड़ना होता है, बांटना नहीं। लेकिन सत्ता के लालच में आज कैंपस के भीतर ‘जाति की दीवारें’ ऊंची की जा रही हैं। देश भर में छात्रों का आक्रोश और विरोध इस बात का प्रमाण है कि युवा अब इस एकपक्षीय एजेंडे को समझ चुका है। सरकार को यह समझना होगा कि संविधान ‘समानता’ की बात करता है, ‘विभाजन’ की नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर फिलहाल इस ‘विभाजनकारी प्रयोग’ को थाम लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है… क्या वोट के लिए समाज की अखंडता को दांव पर लगाना सही है? ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा लगाने वाली सरकार आखिर क्यों एक खास वर्ग के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है?



























