न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
ये खुलासा सनसनीखेज है। ED के रडार पर ‘कोडवर्ड’ वाला लालू परिवार का ये सहयोगी लंबे समय से था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के ‘फर्स्ट फैमिली’ का सबसे बड़ा राजदार और आर्थिक बिचौलिया यानी दलाल माना जाता है। गिरफ्तार व्यवसायी है अमित कात्याल, जो कथित तौर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बेहद करीबी है। ED सूत्रों के मुताबिक, कात्याल की गिरफ्तारी महज ₹300 करोड़ के फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री कार्यकाल के बहुचर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job Scam) घोटाले की काली जड़ें खोलती है!
’कनेक्शन’ जो उड़ा देगा होश : एक ही पते पर दो दुनिया
ED की जाँच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह है लालू परिवार से कात्याल का गहरा और संदिग्ध जुड़ाव। जिस आलीशान आवास में तेजस्वी यादव रहते हैं, अमित कात्याल की विवादित कंपनी एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड का रजिस्टर्ड ऑफिस भी कथित तौर पर उसी पते पर था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सिर्फ एक पते का संयोग नहीं है, बल्कि मनी लॉंड्रिंग और बेनामी संपत्ति छिपाने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। जानिए उस ‘डील’ के बारे में भी जिसकी कीमत है ₹300 करोड़। नौकरी के बदले जमीन का खेल क्या था! अमित कात्याल पर मुख्य रूप से दो गंभीर आरोप लगे हैं : कात्याल और उनकी कंपनियों पर ₹300 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े का आरोप है। यह राशि रियल एस्टेट सौदों और फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी से जुड़ी बताई जा रही है। लैंड फॉर जॉब में भूमिका को लेकर भी सवालों के घेरे में हैं। ED का आरोप है कि कात्याल ने लालू परिवार के फ्रंट मैन की भूमिका निभाई। जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब कात्याल ने नौकरी पाने के इच्छुक गरीब परिवारों से उनकी कीमती जमीनें बाजार भाव से कई गुना कम कीमत पर खरीदीं। ये जमीनें बाद में AK इंफोसिस्टम्स के रास्ते से लालू परिवार के नियंत्रण वाली संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी गईं।
जांच एजेंसी का दावा है कि कात्याल ने लालू परिवार के लिए एक ऐसा आर्थिक गलियारा तैयार किया जिसके माध्यम से अवैध रूप से कमाए गए पैसे (नौकरी के बदले लिए गए जमीन/पैसे) को वैध व्यावसायिक रंगत दी जा सके। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कात्याल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि एजेंसी अब इस घोटाले में शामिल आर्थिक ढांचे और सहयोगियों पर सीधी कार्रवाई कर रही है।
इस गिरफ्तारी से लालू परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, क्योंकि यह मामला अब केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें एक बड़े आर्थिक फर्जीवाड़े और धनशोधन का कोण भी जुड़ गया है। अब आशंका है कि कात्याल और उनकी कंपनियों से जुड़ी और भी कई अहम संपत्तियां ED जल्द ही कुर्क कर सकती है।
ब्रेकिंग एक्सक्लूसिव! लालू परिवार का सबसे बड़ा राजदार गिरफ्तार : ₹300 करोड़ का ‘महा-फर्जीवाड़ा’ लैंड फॉर जॉब घोटाले मामले में भी कनेक्शन, ये तेजस्वी का सबसे खास

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