न्यूज स्कैन ब्यूरो, किशनगंज
बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में सोना तस्करी का जाल लंबे समय से फैला हुआ है।दुबई से सोना बांग्लादेश लाया जाता है और फिर वहां से किशनगंज, इस्लामपुर, सिलीगुड़ी, दलखोला, रायगंज, मालदा जैसे रूटों के जरिए पूरे देश में खपाया जाता है। बताया जाता है कि इंडिया से होने वाली बांग्लादेश तक पशु तस्करी के बदले इंडिया में गोल्ड भेजा जाता है।इसलिए पशु तस्करी और सोने की तस्करी का साझा अवैध कारोबार यहां कई दशक से चल रहा है,जिसका सबसे बड़ा ठिकाना किशनगंज से बिलकुल सटा उत्तर दिनाजपुर का मल्लिकपुर पशु हाट है। यह तस्करी नेटवर्क इतना संगठित और मजबूत है कि तस्करों की गिरफ्तारी दुर्लभ ही होती है – इन्हें अपवाद ही माना जा सकता है।हालांकि, हाल के महीनों में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई हैं। लगभग डेढ़ माह पहले BSF ने किशनगंज क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3 करोड़ रुपये के सोने के साथ दो तस्करों को पकड़ा था। अब उसी मामले की कड़ी जुड़ते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की टीम ने बड़ा कदम उठाया है। उन गिरफ्तार तस्करों की सेटिंग जिस ज्वेलरी कारखाने से थी, आज उसी कारखाने में DRI की टीम जांच के लिए पहुंची है।
पश्चिम बंगाल की DRI टीम ने किशनगंज शहर के सोनार पट्टी रोड स्थित एक प्रमुख ज्वेलर्स कारखाने में बुधवार को अचानक छापेमारी की। सिलीगुड़ी स्थित DRI की टीम सदर थाना पुलिस के सहयोग से यह कार्रवाई कर रही है। जांच का फोकस सोना तस्करी से जुड़े संभावित लिंक पर है। गुप्त सूचना के आधार पर मुख्यालय के निर्देश पर टीम ने कारखाने में तलाशी अभियान शुरू किया।कार्रवाई शुरू होते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और लोग आश्चर्यचकित रह गए। हालांकि, किसी भी अधिकारी ने इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह जांच हालिया गिरफ्तारियों से जुड़ी हुई है और तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।यह क्षेत्र लंबे समय से सोना तस्करी का हॉटस्पॉट रहा है, जहां सीमा पार से आने वाला विदेशी सोना देशभर में खपाया जाता है। DRI की यह कार्रवाई तस्करों को कड़ा संदेश देती है कि अब उनकी गतिविधियां ज्यादा दिन छिपी नहीं रह सकेंगी। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

































