यह आकाशवाणी है… पर आज स्वर रुंधा है- विरजू भाई की आवाज़ हुई अनंत में विलीन: आवाज़ सदा के लिए मौन… आकाशवाणी भागलपुर का स्वर आज थम गया

  • श्रोताओं ध्यान दें…आज आकाशवाणी का सबसे आत्मीय स्वर सदा के लिए शांत
  • अब कभी नहीं गूंजेगी वो आवाज़… “विरजू भाई” की आवाज़ अब ख़ामोश आकाशवाणी भागलपुर का स्वर आज थम गया

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर

भागलपुर की सुबहें अब पहले जैसी नहीं होंगी। आकाशवाणी के मंच से अपनी मधुर, गूंजती और आत्मीय आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले डॉ. विजय कुमार मिश्र 22 फरवरी 2026 (रविवार) को इस दुनिया को अलविदा कह गए। पिछले तीन महीनों से वे अस्वस्थ थे। कोलकाता में इलाज के बाद जब वे कुछ स्वस्थ होकर घर लौटे तो सबको उम्मीद थी कि “विरजू भाई” फिर उसी अंदाज़ में लौटेंगे। लेकिन रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ी और तिलकामांझी स्थित डॉ. वीरेन्द्र के क्लिनिक में उन्होंने अंतिम सांस ली।
यह खबर जैसे ही फैली, पूरे शहर में सन्नाटा छा गया। क्लिनिक के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि वह आवाज़, जिसने दशकों तक दिलों को जोड़े रखा, अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है। परिवार ही नहीं, पूरा भागलपुर शोक में डूब गया। वे अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सैलाब उमड़ पड़ा। तस्वीरें, पुरानी रिकॉर्डिंग्स, यादें-सब कुछ जैसे एक साथ लौट आया। लोग लिख रहे थे-“विरजू भाई, आपकी आवाज़ हमेशा हमारे साथ रहेगी।”
डॉ. मिश्र केवल उद्घोषक नहीं थे, वे आकाशवाणी की पहचान थे। ‘ग्रामजगत’ में उनकी प्रस्तुति और सांत्‍वना साह के साथ उनकी जोड़ी आज भी श्रोताओं की स्मृतियों में जीवित है। ‘हेलो फरमाइश’ को उन्होंने नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। छठ पर्व पर घाटों से उनकी सजीव कमेंट्री सुनने के लिए लोग रेडियो लेकर वहीं पहुंच जाते थे—यह उनकी लोकप्रियता का जीवंत प्रमाण था।
उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कवि सम्मेलनों और राष्ट्रीय आयोजनों में भी अपनी आवाज़ से चार चांद लगाए। विक्रमशिला विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के सामने मंच संचालन का अवसर मिला। वे नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार सहित कई प्रमुख नेताओं के कार्यक्रमों का संचालन कर चुके थे। लेकिन इन सबसे बढ़कर, वे भागलपुर की सांस्कृतिक आत्मा थे।
वे युवा कलाकारों के मार्गदर्शक, समाज के संवाहक और कला-संस्कृति के सच्चे पोषक थे। उनकी आवाज़ में अपनापन था, शब्दों में गरिमा और व्यक्तित्व में विनम्रता।
सोमवार को बरारी श्मशान घाट पर उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। पर सच यह है कि विदाई केवल देह को दी जाएगी—उनकी आवाज़, उनका व्यक्तित्व और उनकी स्मृतियाँ कभी विदा नहीं होंगी।
हे प्रभु… इस अमूल्य धरोहर को अपने चरणों में स्थान देना। “विरजू भाई”, आप हमेशा भागलपुर की धड़कनों में गूंजते रहेंगे।

शोक की लहर

डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में शुभचिंतक और शहरवासियों की भीड़ क्लिनिक पहुंच गई। शहर के सांस्कृतिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि अब उनकी मधुर आवाज़ हमारे बीच नहीं रहेगी। उनके निधन से शहर और परिवार दोनों गहरे शोक में डूब गए। डॉ. मिश्र अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियां सहित पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

सोशल साइट्स पर शोक की लहर

इंटरनेट मीडिया पर शोक संवेदनाओं का तांता लग गया। श्रोताओं, प्रशंसकों और शहरवासियों ने डॉ. विजय कुमार मिश्र की तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग अपने संदेशों और यादों के जरिए उनके व्यक्तित्व और मधुर आवाज़ को याद करने लगे। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोगों ने भावपूर्ण टिप्पणियों के साथ डॉ. मिश्र की यादें ताजा कीं। जिन्हें लोग प्यार से ‘विरजू भाई’ के नाम से जानते थे।

कल होगा अंतिम संस्कार

सोमवार को डॉ. विजय कुमार मिश्र के के पुत्र-पुत्रियों और अन्य संबंधियों के आगमन के बाद बरारी स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहर के लोगों के लिए यह क्षति अत्यंत दुखद है। परिवार, मित्र और शुभचिंतक उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं। उनके निधन ने भागलपुर के सांस्कृतिक और प्रसारण जगत में एक खालीपन पैदा कर दिया है।

सांस्कृतिक और प्रसारण जगत की अपूरणीय क्षति

कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। जगद्गुरु रामानुजाचार्य रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज, कुंदन बाबा, स्वामी जीवनानंद, विधायक रोहित पांडेय, व‍िधान पार्षद डा. एनके यादव, गीतकार राजकुमार, स्वामी तत्वावधान, स्‍वामी मानवानंद, मनोरंजन प्रसाद स‍िंंह, डॉ. विजय कुमार वर्मा, इंजीनियर कामेश्वर शर्मा, आशुतोष प्रभाकर, ब्रह्म्मदेव मंडल, नौमी शांत‍ि हेम्‍ब्रम, व‍िरेन्‍द्र कुमार शुक्‍ल, मनीष गूंज, सत्‍यनारायण मंडल, डा मीरा झा, अतुल प्रियदर्शन, व्रजक‍िशोर रजक, मनीष कुमार ठाकुर, डॉ. प्रीति शेखर, पवन म‍िश्र, द‍िलीप शास्‍त्री सहित कई अन्य लोगों ने शोक जताया।

डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन से भागलपुर के सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।आकाशवाणी पर उनकी प्रभावशाली आवाज ने श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। वे केवल उद्घोषक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और सुसंस्कृत व्यक्तित्व के धनी थे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।

जानिए डॉ. विजय कुमार मिश्र को

डॉ. विजय कुमार मिश्र आकाशवाणी भागलपुर के वरिष्ठ उद्घोषक थे। उनकी आवाज ही आकाशवाणी की पहचान बन गई थी। ग्रामजगत कार्यक्रम में उनकी प्रतिभा देखने को मिलती थी। उनकी आवाज इतनी मधुर और प्रभावशाली थी कि श्रोता बिना सुने कार्यक्रम से नहीं हटते थे। डॉ. विजय कुमार मिश्र और सांत्‍वना साह की जोड़ी ग्रामजगत में आज भी याद की जाती है। लोग उन्हें “विरजू भाई” के नाम से जानते थे, जबकि सांत्‍वना साह को “चंपा बहन” के नाम से जाना जाता था। यहां बता दें क‍ि सांत्‍वना साह का न‍िधन 8 Nov 2018 को हो गया है। 

हेलो फारमाइस …

डॉ. मिश्र ने ‘हेलो फरमाइश’ कार्यक्रम में अपनी सुमधुर आवाज़ से विशेष पहचान बनाई और कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने नाटकों और फिल्मों में भी स्वर दिया तथा अभिनय के माध्यम से अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय कराया। आकाशवाणी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनके योगदान ने प्रसारण की लोकप्रियता और विश्वसनीयता दोनों को सुदृढ़ किया। उद्घोषणा कला में उनका अद्वितीय कौशल उन्हें एक विशिष्ट हस्ताक्षर बनाता था। जिन कार्यक्रमों से वे जुड़े रहते थे, उनकी गुणवत्ता स्वतः निखर उठती थी। वे सच मायनों में आवाज़ के जादूगर थे। उन्होंने अनेक अभिनेताओं और साहित्यकारों से आकाशवाणी के मंच पर सारगर्भित वार्ताएं कीं, जिनका प्रसारण व्यापक रूप से सराहा गया। लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर घाटों से अर्घ्य के दौरान की गई उनकी सजीव कमेंट्री आज भी लोगों की स्मृतियों में ताजा है। लोग रेडियो हाथ में लेकर उस स्थान तक पहुंच जाते थे, जहां से वे कमेंट्री कर रहे होते थे- यह उनकी लोकप्रियता और प्रभाव का जीवंत प्रमाण था।

सरकारी कार्यक्रम और राष्ट्रीय मंच पर भूमिका

डा विजय कुमार मिश्र भागलपुर सह‍ित कई अन्‍य जिलों में सरकारी कार्यक्रमों का संचालन करते थे। उनकी आवाज व संचालन शैली से कार्यक्रमों में चार चांद लग जाता था। उन्हें एक बार राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी के कार्यक्रम में संचालन करने का अवसर भी मिला, जो विक्रमशिला विश्वविद्यालय कहलगांव में आयोजित हुआ था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार सह‍ित कई बड़े नेताओं के भी कार्यक्रमों का संचालन क‍िया था। इसके अलावा कई बार भागलपुर 14 फरवरी को आयोजित मातृ-पितृ कार्यक्रम में संचालन किया था। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी उन्होंने कमेंट्री दी। युवा महोत्सव और भागलपुर महोत्सव में भी उन्होंने अपनी आवाज से सबको प्रभावित किया था। कव‍ि सम्‍मेलन का भी संचालन क‍िया करते थे। 

डाॅ. व‍िजय कुमार मिश्र केवल उद्घोषक नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के पोषक भी थे

डा व‍िजय कुमार मिश्र केवल उद्घोषक नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के पोषक भी थे। वे भागलपुर और आसपास के क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में खड़े थे। उनके योगदान से स्थानीय कलाकारों और युवाओं में उत्साह और प्रेरणा बढ़ी। उन्होंने सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया और स्थानीय किसानों व समाज के कमजोर वर्गों के लिए पहल की। वे कला व संस्‍कृत‍ि के पोषक थे। डा म‍िश्र अंग क्षेत्र के किसी धरोहर से कम नहीं थे।

स्थानीय लोगों और कलाकारों की भावनाएं

डॉ. विजय कुमार मिश्र का जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे सांस्कृतिक और प्रसारण जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन की खबर से शहर के कलाकार, शिक्षक, कवि और श्रोताओं में गहरा शोक है। डॉ. मिश्र का व्यक्तित्व, उनका मधुर संवाद और उनके द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम लोगों की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।

भावनात्मक और सामाजिक योगदान

वे समाज और संस्कृति के संवाहक थे। उनके मार्गदर्शन और अनुभव से कई युवा उद्घोषकों और कलाकारों को प्रेरणा मिली। कला-संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें लोगों के दिलों में और गहरा स्थान दिलाया। उनकी छवि केवल उद्घोषक के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षक के रूप में भी स्थापित हुई। 

नवीन पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डा. व‍िजय कुमार मिश्र ने हमेशा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कई उद्घोषक और कलाकारों को प्रशिक्षित किया। उनके अनुभव और संवाद शैली ने नए कलाकारों के लिए मार्गदर्शन का काम किया। उनके योगदान ने आकाशवाणी और सांस्कृतिक जगत में नए मानक स्थापित किए। उनके निधन से आकाशवाणी और भागलपुर की सांस्कृतिक दुनिया में शून्य पैदा हो गया है। उनके योगदान और मधुर आवाज़ की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

अंतिम श्रद्धांजलि और स्मृति

सोमवार को उनके पुत्र-पुत्रियों और परिवारिक सदस्यों के साथ बरारी स्थित श्मशान घाट पर डॉ. विजय कुमार मिश्र को अंतिम विदाई दी जाएगी। डॉ. मिश्र के पूर्वज आरा के निवासी थे, किंतु पिछले तीन पीढ़ियों से उनका परिवार तिलकामांझी कटहलबाड़ी में निवास कर रहा है। वे अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजन गहरे शोक में डूबे हैं।

सांस्कृतिक और प्रसारण जगत का अनमोल धरोहर

डॉ. विजय कुमार मिश्र की आवाज और व्यक्तित्व ने भागलपुर को प्रसारण के क्षेत्र में एक अलग पहचान दी। उनकी स्मृति और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। भागलपुर के श्रोताओं और कलाकारों के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा स्थापित मानक और आदर्श हमेशा याद किए जाएंगे, और उनकी मधुर आवाज़ की गूंज लंबे समय तक लोगों के कानों में सुनाई देती रहेगी।

हे प्रभु…! इन्‍हें सद्गत‍ि प्रदान करना

शोक जताते हुए लोगों ने कहा कि हमने अपने परिवार के एक सदस्य को खो दिया है। डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन पर आरएसएस, भाजपा व व‍िवेकानंद केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भी गहरा दुःख व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। शोक जताने वालों ने कहा क‍ि- व‍िरजू भाई हमारे धरोहर हैं। उन्‍होंने अंग क्षेत्र को गौरवान्‍व‍ित क‍िया है। हमेशा वे हमारी यादों में रहेंगे। काश! अभी कुछ द‍िन और हम लोगों के बीच रहते व‍िरजू भाई। हे प्रभु…! तुने इस धरा से एक अमूल्‍य धरोहर को उठा ल‍िया। इन्‍हें सद्गत‍ि देना। 

शोक जताया, दी श्रद्धांजल‍ि

डॉ. चंद्रशेखर साह, हरविंद नारायण भारती, श्रीधर मिश्र, राजेंद्र वर्मा, संजय घोष, मनोज मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र, रिंकू, नीलराज, सरोज वर्मा, अरुण तिवारी, अमित तिवारी, नारायण जी, प्यारे हिंद, डॉ. अमरेन्द्र, डॉ. मनोज मीता, डॉ. सुधीर मंडल, रविशंकर रवि, प्रसून लतांत, सुधीर कुमार प्रोग्रामर, आलोक कुंदन, डॉ. विवेक कुमार, मधुव्रत चौधरी, अशोक कुमार चौधरी, डॉ. प्रेम चंद पांडेय, कवि मुरारी मिश्र, विद्या वाचस्पति पंडित आमोद कुमार मिश्र, गौतम सब्यसाची, त्रिलोकीनाथ दिवाकर, प्रतीम कुमार विश्वकर्मा, नीतीश हरिओम, जीया गोस्‍वामी, लोक गायिका अर्पिता चौधरी, सुगम, अमरदीप शुक्ला ‘नटवर’ सहित अनेक गणमान्य लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।