भारतीय होम्योपैथी के गौरवशाली इतिहास में 10 अप्रैल 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। दुनिया भर में भारतीय होम्योपैथी का झंडा बुलंद कर रहे बर्नेट होम्योपैथी प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नीतीश चंद्र दुबे के विजन का ही परिणाम है कि अब दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित लोकतांत्रिक मंच ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारतीय चिकित्सा पद्धति का डंका बजने वाला है। आगामी ‘वर्ल्ड होम्योपैथी समिट-4’ के इस ऐतिहासिक आयोजन की कमान संभालने और तैयारियों का जायजा लेने के लिए डॉ. नीतीश दुबे लंदन पहुंच चुके हैं।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, लंदन/नई दिल्ली
दुबई के आलीशान बुर्ज-अल-अरब और जर्मनी में होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनीमैन की जन्मस्थली के बाद अब लंदन में डॉ. नीतीश की अगुवाई में हो रहा यह आयोजन भारत को इस क्षेत्र में ‘विश्व गुरु’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। लंदन पहुंचने के बाद डॉ. नीतीश दुबे ने एक बेहद भावुक और ओजस्वी संदेश साझा करते हुए कहा कि, आज मेरी आँखों के सामने बिहार के मुंगेर जिले के कल्याणपुर के उस छोटे से क्लिनिक की तस्वीर घूम रही है जहाँ से मैंने इस सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि यह वही ब्रिटिश पार्लियामेंट है जहाँ कभी होम्योपैथी का मजाक उड़ाया गया था, लेकिन आज हमने उस चुनौती को स्वीकार कर इसी संसद के उच्च सदन में दुनिया भर के होम्योपैथी दिग्गजों को जुटाने का फैसला किया है। यह आयोजन सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारतीय होम्योपैथी के वैश्विक नेतृत्व का ऐतिहासिक क्षण है।

तीन दिनों तक चलने वाले इस भव्य आयोजन के पहले दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट में होम्योपैथी की अस्मिता का जोरदार शंखनाद होगा, जहाँ दुनिया भर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक इसके प्रभाव पर चर्चा करेंगे। दूसरे दिन पूरी टीम नेशनल म्यूजियम का भ्रमण करेगी और तीसरे दिन डॉ. नीतीश की अगुवाई में चिकित्सकों का दल विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाएगा। इस वैश्विक मिशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी समर्थन मिल रहा है, जिसका प्रमाण कार्यक्रम में शामिल होने वाले क्रिकेट जगत के दिग्गज हैं। इंग्लैंड को विश्व विजेता बनाने वाले कप्तान इयोन मॉर्गन, महान बल्लेबाज सर एलिस्टर कुक, दिग्गज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड और इंग्लैंड टीम के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम जैसी हस्तियां डॉ. नीतीश के इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। डॉ. दुबे ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को देश के हर होम्योपैथ डॉक्टर को समर्पित करते हुए कहा कि यह गौरव हर भारतीय का है, क्योंकि अब भारतीय होम्योपैथी वैकल्पिक चिकित्सा नहीं, बल्कि दुनिया की मुख्यधारा की चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।
































