न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
भागलपुर के समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में लंबित डी०सी० (डिमांड कैश) और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के समायोजन हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि कुछ अधिकारी वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से जुड़े।
बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि जिले के 59 निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के स्तर पर लगभग 65 करोड़ रुपए का डी०सी० विपत्र लंबित है, जबकि कुल 62 पदाधिकारियों के स्तर पर कुल ₹293 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्र महालेखाकार कार्यालय और संबंधित विभाग को उपलब्ध कराए जाने हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि 01.04.2019 के बाद की अवधि के डी०सी० विपत्र एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र अब ऑनलाईन CFMS पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण नहीं भेजे जा पाए तो उन्हें ऑफलाइन माध्यम से AC/DC & UC संग्रहण केन्द्र, वित्त विभाग, पटना के माध्यम से महालेखाकार कार्यालय में समर्पित किया जाए। वहीं, 01.04.2019 से पूर्व की अवधि के सभी दस्तावेज पहले की तरह ऑफलाइन भेजे जाने सुनिश्चित किए जाएँ।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन यू०सी० (उपयोगिता प्रमाण-पत्र) जमा करते समय तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिसके समाधान हेतु टिकट जारी किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि वित्त विभाग के पत्र के अनुसार अब सभी डी०सी० विपत्र एवं यू०सी० दस्तावेज 48 घंटे के भीतर महालेखाकार कार्यालय में समर्पित किए जाएँ।
जिला कल्याण कार्यालय ने अवगत कराया कि उनके यहां के अभिश्रव संबंधी दस्तावेज सीबीआई के पास हैं, जिससे डी०सी० विपत्र तैयार करने में बाधा आ रही है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सीबीआई कार्यालय से समन्वय स्थापित कर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर डी०सी० विपत्र तैयार किया जाए।
जिला स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि पूर्व में डी०सी० विपत्र महालेखाकार कार्यालय को भेजा गया था, परंतु कुछ आपत्तियों के साथ वापस आया। जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित BTC Form-278/81 एवं 27C/C1 संलग्न कर 24 घंटे के भीतर पुनः समर्पण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिले के 13 डी०डी०ओ० के पास लंबित डी०सी० विपत्र का 90% राशि और उपयोगिता प्रमाण-पत्र का 95% राशि सन्निहित है। इनमें जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्राचार्य, अस्पताल, वन प्रमंडल अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी आदि शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने सभी पदाधिकारियों को चेतावनी दी कि 2 जनवरी 2026 से वृहद निरीक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। वे स्वयं जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण में यदि खामी पाई जाती है तो संबंधित जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह निरीक्षण शिक्षण संस्थान, आंगनबाड़ी केंद्र, अस्पताल, पैक्स, पंचायत भवन, आरपीएस सेंटर, पीडीएस डीलर और कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता सहित अन्य विभागों तक विस्तारित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने कार्यालयों और संस्थानों की गुणवत्ता सुधारें और लंबित डी०सी०/यू०सी० दस्तावेज समय पर समर्पित करें, ताकि विभागीय कामकाज में व्यवधान न आए।
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