भागलपुर: बिहार को प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन (Health Tourism) के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वर्षों पुराना सपना अब साकार होता दिख रहा है। भागलपुर स्थित तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में सात समंदर पार नीदरलैंड्स से आए एक शोधकर्ता के प्रवास ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर गाड़ दिया है।
विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना ‘तपोवर्धन’
नीदरलैंड्स के युवा शोधकर्ता फ्लोरिस डी राउटर वर्तमान में तपोवर्धन केंद्र में रहकर भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, मिट्टी-जल चिकित्सा और सात्विक आहार का गहन अध्ययन कर रहे हैं। केंद्र के प्रमुख जेता सिंह ने बताया कि फ्लोरिस यहाँ की उपचार शैली से इतने प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने न केवल अपने देश जाकर इसका प्रचार करने का संकल्प लिया है, बल्कि अगले माह अपनी बहन और मित्र को भी यहाँ आने के लिए आमंत्रित किया है।
मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम
जेता सिंह ने साझा किया कि इस केंद्र के विकास के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से यह इच्छा जताई थी कि बिहार के लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े, बल्कि देश-दुनिया के लोग बिहार आकर स्वास्थ्य लाभ लें। मुख्यमंत्री की मंशा थी कि
बिहार में नेचुरोपैथी को वैश्विक पहचान मिले।
विदेशी नागरिक यहाँ उपचार और अध्ययन के लिए आएँ।
इससे राज्य में विदेशी मुद्रा और पर्यटन को बढ़ावा मिले।
”किसी विदेशी मूल के व्यक्ति का पहली बार इस केंद्र में दीर्घ प्रवास करना हमारे लिए गर्व का विषय है। यह मुख्यमंत्री की उस दूरदर्शी सोच का प्रमाण है, जिसमें उन्होंने भागलपुर को वैश्विक पटल पर देखने की कल्पना की थी।”
— जेता सिंह, प्रमुख, तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी पहचान
फ्लोरिस डी राउटर का यह प्रवास तपोवर्धन केंद्र के लिए एक नई शुरुआत है। शोधकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वे नीदरलैंड्स लौटकर भागलपुर की इस चिकित्सा पद्धति के अनुभवों को साझा करेंगे, जिससे भविष्य में यूरोपीय देशों से भी रोगियों और शोधकर्ताओं के यहाँ आने की राह खुलेगी।

























